लंडन की सैर
पिछली दफा सरदार करारा सिंह ने मुझे वो मजा दे-दे चोदा कि मैं उसके लंड की दीवानी हो गई। सरदारजी का लौड़ा वो मोटा -लाल भभक और बेहद गरम था कि क्या बताऊँ। मैं उससे दोबारा-तिबारा चुदवाना चाहती थी तो मैंने उसे फोन किया। मगर उसकी 2-शर्तें थीं । पहली ये कि उसके दो दोस्त जो उसकी ही उम्र के --- यानी 58-59 के हैं , वो भी मुझे चोदेंगे। मैने जब ये शर्त मान ली तो उसने एक शर्त और रख दी। उसने भी लाला रमणलाल की तरह अपने और अपने दो दोस्तों के लिए, कन्याओं अर्थात तीन कच्ची-कमसिन छोरियां लाने की डिमांड की। ये काम मेरे लिए मुश्किल और जोखम भरा था पर वो अकड़ गया। लिहाजा मुझे उसकी ये शर्त माननी ही पड़ी। चोदाई कहाँ होगी ? होटल में या फ़ार्महाउस मेँ ? तो उसने कहा-- दोनों जगह । तय हुआ कि अगले दिन -- सोमवार -- को दिन के 10 बजे मैं तीन कमसिन छोकरियों के साथ होटल ताज पेलेस पहुँच जाऊं।करारा सिंह ने जब कन्याओं की उम्र बताई तो मैं सहम गई।
सोमवार को मैं ठीक वक्त पर पहुंची तो वो तीनों ''चूत'' लेने के लिए फड़फड़ा रहे थे। सरदार करारा सिंह तो 58 के थे पर दूसरे दो 59 वर्ष के। एक का नाम था- - पहलवान लालाराम, जो नाम से ही नहीं काम से भी पहलवान थे। उसे देख मैं कांप गयी , सोचा ये मेरे पर चढ़ेगा तो मैं बर्दाश्त कैसे करूंगी ! दूसरे मर्द का नाम था- - सेठ चिम्मन भाई लंडनवाला। सचमुच उनका 'लंड' सांड की तरह मोटा और कठोर था।करारा सिंह ने अब 'कन्याओं' के बारे में पूछा तो मैंने कहा ' वो आती ही होंगी '। और देखते ही तीन कन्याएँ आगईं, तीनों 17 साल की। एक मुस्लिम थी, दूसरी ईसाई, तीसरी हिन्दू। जो मुस्लिम थी उसने सलवार-कुर्ती , ईसाइन ने स्कर्ट-टॉप्स, और हिन्दू जो थी उसने लहंगा-चोली पहन रखी थी। मुस्लिम छोरी का नाम था-- 'तबस्सुम '। उसे देखते ही करारा सिंह उसकी सलवार से चिपट गया और '' वाह, मेरी मुन्नी - वाह मेरी मुन्नी'' कहते हुये तबस्सुम के गाल मरोड़ने व चुम्मा चाटी करने लगा। करारा सिंह की करारी जीभ मुन्नी के गालों पर ज़ोर-ज़ोर से फिर रही थी; अब तो सरदार ने इस बालिका के मुंह में अपनी जीभ भी डाल दी और वो बच्ची की जीभ से जीभ भिड़ा चुम्मी का 'मजा' लेने लगा। सरदार जी के हाथ अब तबस्सुम की कुर्ती खोलने को उतावले हो गए, उसकी कुर्ती खुली तो आहा, वाह जी वाह, कुर्ती के नीचे ब्रा ना होने से इस कमसिन कन्या के कबूतर फड़फड़ा कर सरदार जी के हाथ मे आ गए। ओह, क्या 'गरम-गरम' मम्मे कि सरदार का लंड एकदम से टन्नाते हुये खड़ा हो गया जो पीछे से उस छोरी की गांड मे भक-से घुस गया। ठीक इसी वक्त सेठ चिम्मन भाई सामने से आ बालिका की नाभि से भिड़ गए। अब मुन्नी का एक मम्मा सरदार जी अपने मुंह मे लिए हुये थे तो दूसरा मम्मा सेठ जी दबोचे हुये थे। दोनों लप-लप करके मुन्नी की चूँची चूँस रहे थे। चूँची चूँस रहे थे दोनों और मम्मो को आटे की तरह गूँध-गूँध कर, मरोड़ -मरोड़ कर मजा ले रहे थे छोरी की मासूम जवानी का। सेठ का हाथ अब तबस्सुम की सलवार का नाड़ा खोलने लपका। उन्होने अपनी दोनों जांघें तो पहले ही लड़की की जांघों से सटा रखी थी। जेसे ही सलवार का नाड़ा खुला दोनों मर्दों के हाथ उसकी पेंटी खोलने को एक साथ बढ़े। दोनों ने पेंटी में नाखून चुभो-चुभो कर उसे करीब-करीब फाड़ डाला, अब एक प्यारी-सी गुड़िया रानी इन दो 58-59 साल के मर्दों को चोदाई का मजा देने के लिए मादरजात नंगी थी। सरदार करारा सिंह ने मुन्नी की गाँड के दोनों गोलक हाथ से चौड़े किए और फिर उसकी गाँड के छेद में अपना मोटा-करारा लौड़ा ठरका दिया जो एकदम से तीन इंच अंदर घुस गया। उधर सेठ चिम्मन भाई उसकी 'चूत' पर अपनी हथेली रगड़ रहे , फिर अंगुल की, और '' ले बेटी, लंडनवाला का लंड '' कह, बिटिया की चूत में अपना फुफकारता लौड़ा पेल दिया। सरदार जी का 7 इंच घुस गया तो सेठ जी का 5 इंच ; फिर ज़ोर का धक्का मारा तो दो लंड आगे पीछे 9 इंच पूरे-पक्के घुस गए। छोरी दर्द और मजा दोनों झेलते चिल्ला रही थी -- '' ओह, आह - आह- आह; धीरे मारो , हाए, आह, उफ़्फ़ '' सिसकारियाँ की मधुर आवाजें भी आ रही थी और दर्द की भी। इस वक्त मैंने भी पहलवान
लालाराम को कहा की वो गुड़िया के मुंह में लंड मार दे '। लालाराम ने अपने लंड का सोपारा तब्बू बेबी के मुंह में जबर्दस्ती कर डाला फिर भी वो दो इंच से ज्यादा भीतर नहीं गया; मैंने गुड़िया का मुंह अंगुलियाँ घुसा-दबा कर खोला तो लंड 4 इंच तो कंठ में घुस ही गया। ईसा तरह अपनी पोती की उम्र की कन्या को इन तीन 58-59 के पुरुषों ने पौन घंटे तक बिना रुके चोदा। तीनों अपनी जांघें दबा- दबा और अपनी मोटी गांड उछाल -उछाल लड़की चोद रहे थे। झड़ने से पहले सबने अपने लंड निकाल अपना वीर्य उसके मुंह में व गालों पर छिड़क दिया।
अगली बारी स्कर्ट-टॉप्स पहने बेठी ईसाई कन्या 'लिली' की थी। उस पर तीनों नंगे मर्द एकसाथ झपटे और उसे जमीन पर गिरा दिया। सबने मिलकर अपने दांतों व नाखूनों से उसके बाहर के कपड़े नोंच कर उतार डाले। इस ने तो भीतर ब्रा व पेंटी भी नहीं पहन राखी थी सो वो एकदम नंगी उनके सामने पड़ी थी। मैंनें बारी-बारी उसे उलट -पुलट ,चित-पुट चित-पुट किया ताकि ये लोग उसकी कमसिन चूत व मस्त गांड को टटोल-टटोल कर देख सकें। फिर उसे उठा कर खड़ी किया। उसके मुंह में शराब ड़ाल पिलाई ताकि नशे में वो चहके। मैं नंगी हो 'लिली' की गांड से सट गयी थी। सरदार करारा सिंह, पहलवान लालाराम, और सेठ चिम्मन भाई --- तीनों एकसाथ इस छोकरी की चूत में अपनी-अपनी अंगुलियाँ निहायत बेशर्मी से घुसा रहे थे, मैंने भी उसकी चूत में अंगुल डाली। पहलवान लालाराम इस लड़की की चूत में अपना मोटा-मोटा भरकम भीम-भयंकर लौड़ा घुसा -घुसा चोदना चाहते थे; इसलिए इसकी चूत का छेद इतना चौड़ा तो होना ही चाहिए की लाला का लंड उसमें फंस सके। कोई 20 मिनट की कोशिश के बाद चूत का छेद चौड़ा हुआ और अंदर की झिल्लियाँ दिखने लगी। भीतर लाल-भभक था। सेठ चिम्मन भाई लंडनवाला लड़की की गांड मारना चाहता था, सो वो लड़की की गांड के पीछे लग-सट गया। मैं हट गयी। दरअसल मैं चिम्मन भाई की गांड से सट कर धक्का मारना चाहती थी ताकि वो कन्या की गांड मजबूती से मार सकें। अब जैसे ही लालाराम ने अपना मोटा सोपारा लंड लड़की की चूत में ठोंका वो बिलबिलाने लग गयी। मगर लाला ठोकता रहा। भचक-भचक की आवाजें आ रही थी और पीछे से सेठ जी भी बिटिया की तबीयत से गांड मार रहे। सच कहूँ तो लालाराम का लंड पूरे 10 इंच का था। वो अभी भी मुश्किल से 7 इंच ही उसकी फुदी मे गया होगा। गुड़िया को और शराब पिलाई तो उसका दर्द कम हुआ व वो तेजी से बेशरम होने लगी। चिम्मन भाई भी पीछे से सटासट 'लिली' की गांड मार रहा था । उसका लंड भी बिटिया की गांड मे कोई 6 इंच सरक चुका था। लिली को थोड़ी और शराब पिलाई तो वो बहकने-चहकने लगी। उसने चला कर सरदार करारा सिंह का लंड पकड़ लिया, और बोली--' 'नाना जी, आप मेरी चूत मारोगे या गांड ?'' भचाक, एक धक्का लगा लालाराम के लंड का बिटिया रानी की चुलबुलाती चूत में की लाला पहलवान का लंड साढ़े 8 इंच गुड्डी की चूत में घुस्स; घुस्स-फुस्स । अब मैंने इस प्यारी गुड़िया रानी को डबल बेड पर लिटा दिया; दोनों ओर से गांड मारने व चूत चोदने की धमचक जारी थी। माने बारी-बारी सेठ व पहलवान दोनों की गांड में अंगुली पेली तो उस से दोनों इतने उत्तेजित हुये की बिटिया रानी की गांड में दोनों के दनदनाते लंड पूरे 10 इंच घुस्स गए। '' आह, आह, आहा आहा; हाये हाँ और चोदो, और चोदो --- हाये मजा आ रहा आहा हूँ हूँ हाँ ''। गुड्डी सिसकारियाँ और चसकारियाँ ले-ले अपने दादा-नानाओं को पक्का अश्लील नंगा मजा दे रही थी, 'लिली'- गुड्डी। इसी वक्त सरदार करारा सिंह ने भी गुड्डी के मुंह, कंठ व हलक मे अपना लौड़ा फंसा-घुसा दिया। फिर कोई 15 मिनट वो अपना लंड गुड़िया से चुंसवाता रहा; फिर उसने अपना अँडकोश उसके मुंह मे घुसेड़ा और कहा,'' बेटी, चाब इसे''। आह, क्या अश्लील नजारा ! चिम्मन भाई और लालाराम जब फारिग हो गए तो वो लिली के पेट पर चढ़ गए अपना-अपना लंड उसके कंठ में ठोंकने-थरकने। वीर्य से गुड़िया का पूरा चेहरा लथपथ था। उदार सरदार करारा सिंह ने बिटिया की गांड में लंड ठोंक दिया; इधर सेठ व लाला एकसाथ ही लिली -गुड़ी की चूत में अपना लौड़ा लगाने लगे; यानि अब गुड्डी की चूत में एकवक्त में ही ''दो -दो लंड'' फनफनाने लगे ; इत्ती-सी मुन्नी और दो-दो लंड ले रही !!!
अब चोदा-बाटी में बारी आयी तीसरी मुन्नी-गुड्डी बिटिया रानी की। वो भी 17 साल की। नाम ' 'लिल्ली' याने 'लोलिता'। लहंगा इतना झीना किउसमें से गुप्तांग दर्शन खुल्लमखुल्ला और चोली -बिन-ब्रा की उसमें से उसके मम्मे दिखे निकले-निकले,उमर कम पर मम्मे भरपूर , रसभरे संतरे। मैंने परिचय कराया, ये है ललिता रानी, डांसर ! she is trained for your every whim, I purposey selected it because I myself like to be fucked wildly, and as dirty as it can be. इस पर सरदार करारा सिंह उन दो से बोला, ' ये ठीक कह रही है क्योंकि पिछली बार इसे जब मैंने चोदा तो वो मजा दिया की क्या बताऊँ। सुन कर सेठ चिम्मन भाई का लौड़ा धोती से निकल कर बाहर आ गया। पहलवान लालाराम बोला, ' क्या कह रही है तू , क्या ये तेरी बेटी है कि . . . ' इस पर सेठ चिम्मन भाई बोला : no, she can't be her daughter as her face is so sweet and different, I can bet. and though she is 17 it looks like much yonger,c***d-alike, a k**.so sweet and innocent, bearing a c***d like face !'.करारा सिंह बोला, 'क्या ये 'गंदा' , 'अश्लील' नाच सकती है ? अश्लील बोल-गा सकती है ?'I said: 'yes, of course. I trained heer for 'lap dance' and ' Special Anal Fuck! She is cute , and can whisper'obscene' as you might wish. . .' इस पर पहलवान लालाराम ने कहा, देख, इस ये जो 'लिल्ली' है तेरी इस से हम अश्लील बोलेंगे, जम कर; फिर मत कहना जो ये मुनिया शरम खा जाए।' उस वक्त चिम्मन भाई चारों टांगों पर जानवर की तरह सरकता हुआ 'लिल्ली' के पास गया। जैसे ही वो पहुंचा 'लीलली' ने अपनी टांगें भरपूरा चौड़ी करदी, सेठ ने अपना मुंह 'लिल्ली' के लहंगे मे घुसा दिया, फिर मुंह ऊपर कर दिया, जैसे वो 'लिल्ली' की चूत प्राईवेट मे देखना चाहता हो। तभी 'लिल्ली' नीचे झुकी और उसके मुंह पर बेठ गयी,' और फुसफुसा कर गाने लगी : '' अय-अय, अय-अय आया जो मजा ; सेठ जी के मुंह मेरी 'चूत' लग जा''। बाहर से हम सबको पता लग रहा था कि सेठ न केवल चूत चाट रहा था बल्कि उसकी जीभ लिल्ली की गाँड व फुद्दी के बीच भी फिसल रही थी। पहलवान लालाराम अब सकते में आ गया, उसने लिल्ली को सेठ से अलग किया और 'उफ़्फ़', इस पहलवान ने लिल्ली को गेंद कि तरह उठा मेरे पास ले आया, वो बोला उझसे ' चल नचवा इसे, नंगी-नंगी ; और तू गा , अश्लील गाना, देखूँ मैं भी मुन्नी-नाच । ' मैं उसे प्राइवेट में ले गयी, कुछ समझाया । सब लोग --- कुल 3 ही तो थे, सभी ने कपड़े पहने हुये पर लंड बाहर ! मुन्नी पहले अपने कपड़े उतारे बिना नाची। गोल-गोल घेरे में , अपनी छातियाँ, चूत और गाँड अचका-मचका के और कमर लचका के। मैं गा रही थी: ' नाना जी मेरा लहंगा उतारो, दादाजी मेरी चोली फाड़ो ; नंगी कर दो मेरी जवानी, चुत में अपना 'लौड़ा' गाड़ो। देखो-देखो देखो, लाला-सेठ-सरदार ; नंगी मेरी गाँड -चूत बड़ी मजेदार। बड़ी मस्तानी है फुद्दी हमारी , कर लो सवारी लाला कर लो सवारी ।'' फिर मुन्नी लहंगा ऊंचा कर गाँड -चूत दिखा-दिखा नाची । मैं फिर गाने लगी: ' देख मुन्नी, देख ये करारा सरदार है, दस इंच लंड नंगा खूब मजेदार है, देख मुन्नी देख लाला बड़ा पहलवान है, इस का भी दस इंच लंड बलवान है।देख मुन्नी इधर चिम्मन भाई तैयार है , सेठ जी का लंड भी प्रचंड मजेदार है। '' इस अर्ध नग्न नृत्य के बीच किसी ने लहंगा तो किसी ने चोली खींच मुन्नी रानी को एकदम निखालिश मादरजात नंगी कर दिया, अब वो चूत की फांक और गाँड की दरार दिखा-दिखा नाचने लगी।, साथ ही चूँचियां निचोड़ के भी दिखा रही थी। इस वक्त कोई उसकी चूत में तो कोई उसकी गाँड में अंगुली घुसेड़ रहा था। मेरा गाना चल रहा था: ' चोद लाला, चोद सेठ, सिख-सरदार चोद पहलवान छोरी , लंड से पछाड़'। '' इस के बाद तो जैसे आग लग गयी। सब इस छोरी पर चढ़ाई करने और इसका मांस नोंचने उतारू हो गए। मुन्नी को छोड़ने के लिए तीन लंड थे , तीनों अलग-अलग भाँत के। पहलवान लालाराम का लंड सबसे बड़ा, वो न केवल लंबा पर मोटा भी बहुत ज्यादा। सेठ जी का लंबा था पर मोटा उतना नहीं, सरदार जी का लंड बड़ा अश्लील, झांटदार । मुन्नी उसकी झांटें सहला-सहला और लंड की किनारी पर हाथ फिरा सरदार जी को मजा दे रही थी; साथ ही दूसरे हाथ से सेठ जी के अंडकोश पर चिकोटी भी काट रही थी। पहलवान मुन्नी के मम्मे मुंह मार ले रहा था, गरम गोश्त मींज-मसल-रगड़ रहा था; फिर चूचियाँ चबाई; दर्द हुआ छोरी को, पर ऐसे में सहन करना ही पड़ता है। फिर सर्वसम्मति से तय हुआ कि जब ये लोलिता इतनी कमसिन है तो क्यों न इसकी गाँड मारी जाए। सो पहले पहलवान लालाराम ने उसे अपनी गोद में बिठाया। उसका लंड 90 डिग्री पर खड़ा था। वो पहले तो लिल्ली की चूतड़ के कई किनारों पर दब-सट रहा था, मगर फिर गाँड़ के छेद में धँसने लगा। फिर लालाराम उठ खड़ा हुआ, सेठ चिम्मन भाई से बोला, ले तू भी इसका जायका ले, बड़ी गरम-गोश्त गाँड है छोरी की। सेठ की गोद में भी वो बेठी । सेठ बोला, ' बेटी, थोड़ा अपनी टांगें हिलाओ,', मुन्नी ने टांगें और जांघें दोनों हिलाईं। इस से सेठ का मजा बढ़ गया। अब सरदार करारा सिंह कि बारी आयी तो वो बोला, मुन्नी ! तुम बस खड़ी हो कर अपनी एक टाँग ऊपर उठाओ, उसने उठा दी । सरदार ने मुन्नी के बुरी तरह से गाल मरोड़ पूछा, 'तुम्हें मेरा लंड पसंद है? बता बेटी? सबने कहा, ' हाँ , बता बेटी !' तो वो बोली, ' अंकल , मुझे तो आप सबके लंड बहोत पसंद है।' पहलवान बोला, ' बेटी, पसंद है तो फिर ये भी बता कि क्या तुझे 'गाँड मरवाना पसंद है ?' सेठ बोला, 'तुझे पता है कि लड़की की गाँड कैसे मारते हैं ?' मुन्नी ने मेरी ओर इशारा किया तो मैंने समझा दिया कि इस पर क्या कहना-करना है'। सो मुन्नी हँस कर बोली, 'अंकल जी आप सब मेरी गाँड मारना चाहते हो न ? सेठ ने कहा 'वो तो ठीक है पर तू अपने मुंह से बोल कि गाँड मारना क्या है और कोई लड़की मर्द से कैसे गाँड मरवाती है ?' ''जी, अंकल ! वो क्या है कि जब मर्द का लौड़ा याने लंड ( फिर मुन्नी ने दो का लंड पकड़ा) ये लंड , जैसे मैं लड़की हूँ तो वो मेरी चूतड़ के बीच एक छेद है, वो , उसे 'गाँड' बोलते हैं, देखो 'ये' ( यहाँ मुन्नी ने बारी-बारी से तीनों की अंगुली अपनी गाँड मे घुसा कर बताई) ; जब ये लौड़ा अंदर, इस्स छेद के अंदर जाता है तो मर्द को मजा आता है और इसे ही 'गाँड मारना' कहते हैं।' करा सिंह ने कहा, 'बेटी, ये, इतना तुझे पता कैसे चला ?' वो बोली, ' अंकल, जब मैं 9 साल की थी तो मेरे सगे ताऊ जी मेरी गाँड मारते थे; जब मैं 11 साल की थी तो मेरे सगे मौसा जी ने मेरी चूत चोदी ; 15 साल कि उम्र में स्कूल के हेड मास्टर जी ने मेरे मुंह मे लंड घुसेड़ अपना वीर्य पिलाया; तब से चस्का है और मैं भी आंटी की तरह मजा लेती-देती हूँ। करारा सिंह ने कहा ' शाबाश, आज तो हम तीनों तेरी गाँड मारेंगे, बस' ।
तीनों मर्दों ने तालियाँ बजाई तो मैं पास आ गयी। सिख सरदार करारा सिंह ने मुझसे कहा, 'अब हम लिल्ली कि बजाएँगे, इस्स लिए तू इसका सिर नीचे और इसकी टांगे जोरदार चौड़ी कर इसकी गाँड हमें दिखा; हम तीनों इसकी मुन्नी-मुन्नी गाँड का मजा लेंगे । मैंने उनसे कहा, 'क्या मैं इस्स की चूतड़ भी चौड़ी करूँ तो सेठ बोला, 'नहीं वो हम खुद करेंगे; दरअसल हम पहले इसकी गाँड़ में अंगुल-अंगूठा घुसेड़ेंगे; फिर हथेली। इसकी गाँड़ मरने से पहले हम अपना पूरा कमीनापन तुम्हें और इसे दिखाएंगे। सबसे पहले पहलवान ने मुन्नी की गाँड़ के छेद में थूका, फिर बाकी दो ने भी। दो ने उसकी गाँद के छेड़ को कस्स के चौड़ा किया, तभी करारा सिंह ने अपनी दो अंगुल घुसेड़ दी। फिर सेठ जी ने एक अंगुल डाली, और पहलवान ने अंगूठा। सेठ ने एक लुब्रिकेटिंग जेल निकाली और उसे भीतर चुपड़ा। उसके बाद सिख सरदार ने अपनी दाढ़ी ऊंची कर अपना लंबा लंड लिल्ली के छेद में पेल डाला। लिल्ली ने' 'ऊँह' की आवाज की, सरदार ने आधा घंटा तक लड़की की गाँड मारी। इसी के साथ लालाराम ने भी छेद में दो अंगुलियाँ धंसा रखी थी। दरअसल ये जुझारू मर्द चाहते थे की लड़की की गाँड के छेद में कम से कम दो लंड तो चले ही जाएँ । पर वो हुआ नहीं। आखिर में एक के बाद एक करते हुये तीनों ने बालिका की गाँड मारी। इस्स के बाद इसी छोरी की चूत को दांतों मे भर कर तीनों ने मजा लिया।
( अगली किश्त मे ये कहानी पूरी होगी। )
सोमवार को मैं ठीक वक्त पर पहुंची तो वो तीनों ''चूत'' लेने के लिए फड़फड़ा रहे थे। सरदार करारा सिंह तो 58 के थे पर दूसरे दो 59 वर्ष के। एक का नाम था- - पहलवान लालाराम, जो नाम से ही नहीं काम से भी पहलवान थे। उसे देख मैं कांप गयी , सोचा ये मेरे पर चढ़ेगा तो मैं बर्दाश्त कैसे करूंगी ! दूसरे मर्द का नाम था- - सेठ चिम्मन भाई लंडनवाला। सचमुच उनका 'लंड' सांड की तरह मोटा और कठोर था।करारा सिंह ने अब 'कन्याओं' के बारे में पूछा तो मैंने कहा ' वो आती ही होंगी '। और देखते ही तीन कन्याएँ आगईं, तीनों 17 साल की। एक मुस्लिम थी, दूसरी ईसाई, तीसरी हिन्दू। जो मुस्लिम थी उसने सलवार-कुर्ती , ईसाइन ने स्कर्ट-टॉप्स, और हिन्दू जो थी उसने लहंगा-चोली पहन रखी थी। मुस्लिम छोरी का नाम था-- 'तबस्सुम '। उसे देखते ही करारा सिंह उसकी सलवार से चिपट गया और '' वाह, मेरी मुन्नी - वाह मेरी मुन्नी'' कहते हुये तबस्सुम के गाल मरोड़ने व चुम्मा चाटी करने लगा। करारा सिंह की करारी जीभ मुन्नी के गालों पर ज़ोर-ज़ोर से फिर रही थी; अब तो सरदार ने इस बालिका के मुंह में अपनी जीभ भी डाल दी और वो बच्ची की जीभ से जीभ भिड़ा चुम्मी का 'मजा' लेने लगा। सरदार जी के हाथ अब तबस्सुम की कुर्ती खोलने को उतावले हो गए, उसकी कुर्ती खुली तो आहा, वाह जी वाह, कुर्ती के नीचे ब्रा ना होने से इस कमसिन कन्या के कबूतर फड़फड़ा कर सरदार जी के हाथ मे आ गए। ओह, क्या 'गरम-गरम' मम्मे कि सरदार का लंड एकदम से टन्नाते हुये खड़ा हो गया जो पीछे से उस छोरी की गांड मे भक-से घुस गया। ठीक इसी वक्त सेठ चिम्मन भाई सामने से आ बालिका की नाभि से भिड़ गए। अब मुन्नी का एक मम्मा सरदार जी अपने मुंह मे लिए हुये थे तो दूसरा मम्मा सेठ जी दबोचे हुये थे। दोनों लप-लप करके मुन्नी की चूँची चूँस रहे थे। चूँची चूँस रहे थे दोनों और मम्मो को आटे की तरह गूँध-गूँध कर, मरोड़ -मरोड़ कर मजा ले रहे थे छोरी की मासूम जवानी का। सेठ का हाथ अब तबस्सुम की सलवार का नाड़ा खोलने लपका। उन्होने अपनी दोनों जांघें तो पहले ही लड़की की जांघों से सटा रखी थी। जेसे ही सलवार का नाड़ा खुला दोनों मर्दों के हाथ उसकी पेंटी खोलने को एक साथ बढ़े। दोनों ने पेंटी में नाखून चुभो-चुभो कर उसे करीब-करीब फाड़ डाला, अब एक प्यारी-सी गुड़िया रानी इन दो 58-59 साल के मर्दों को चोदाई का मजा देने के लिए मादरजात नंगी थी। सरदार करारा सिंह ने मुन्नी की गाँड के दोनों गोलक हाथ से चौड़े किए और फिर उसकी गाँड के छेद में अपना मोटा-करारा लौड़ा ठरका दिया जो एकदम से तीन इंच अंदर घुस गया। उधर सेठ चिम्मन भाई उसकी 'चूत' पर अपनी हथेली रगड़ रहे , फिर अंगुल की, और '' ले बेटी, लंडनवाला का लंड '' कह, बिटिया की चूत में अपना फुफकारता लौड़ा पेल दिया। सरदार जी का 7 इंच घुस गया तो सेठ जी का 5 इंच ; फिर ज़ोर का धक्का मारा तो दो लंड आगे पीछे 9 इंच पूरे-पक्के घुस गए। छोरी दर्द और मजा दोनों झेलते चिल्ला रही थी -- '' ओह, आह - आह- आह; धीरे मारो , हाए, आह, उफ़्फ़ '' सिसकारियाँ की मधुर आवाजें भी आ रही थी और दर्द की भी। इस वक्त मैंने भी पहलवान
लालाराम को कहा की वो गुड़िया के मुंह में लंड मार दे '। लालाराम ने अपने लंड का सोपारा तब्बू बेबी के मुंह में जबर्दस्ती कर डाला फिर भी वो दो इंच से ज्यादा भीतर नहीं गया; मैंने गुड़िया का मुंह अंगुलियाँ घुसा-दबा कर खोला तो लंड 4 इंच तो कंठ में घुस ही गया। ईसा तरह अपनी पोती की उम्र की कन्या को इन तीन 58-59 के पुरुषों ने पौन घंटे तक बिना रुके चोदा। तीनों अपनी जांघें दबा- दबा और अपनी मोटी गांड उछाल -उछाल लड़की चोद रहे थे। झड़ने से पहले सबने अपने लंड निकाल अपना वीर्य उसके मुंह में व गालों पर छिड़क दिया।
अगली बारी स्कर्ट-टॉप्स पहने बेठी ईसाई कन्या 'लिली' की थी। उस पर तीनों नंगे मर्द एकसाथ झपटे और उसे जमीन पर गिरा दिया। सबने मिलकर अपने दांतों व नाखूनों से उसके बाहर के कपड़े नोंच कर उतार डाले। इस ने तो भीतर ब्रा व पेंटी भी नहीं पहन राखी थी सो वो एकदम नंगी उनके सामने पड़ी थी। मैंनें बारी-बारी उसे उलट -पुलट ,चित-पुट चित-पुट किया ताकि ये लोग उसकी कमसिन चूत व मस्त गांड को टटोल-टटोल कर देख सकें। फिर उसे उठा कर खड़ी किया। उसके मुंह में शराब ड़ाल पिलाई ताकि नशे में वो चहके। मैं नंगी हो 'लिली' की गांड से सट गयी थी। सरदार करारा सिंह, पहलवान लालाराम, और सेठ चिम्मन भाई --- तीनों एकसाथ इस छोकरी की चूत में अपनी-अपनी अंगुलियाँ निहायत बेशर्मी से घुसा रहे थे, मैंने भी उसकी चूत में अंगुल डाली। पहलवान लालाराम इस लड़की की चूत में अपना मोटा-मोटा भरकम भीम-भयंकर लौड़ा घुसा -घुसा चोदना चाहते थे; इसलिए इसकी चूत का छेद इतना चौड़ा तो होना ही चाहिए की लाला का लंड उसमें फंस सके। कोई 20 मिनट की कोशिश के बाद चूत का छेद चौड़ा हुआ और अंदर की झिल्लियाँ दिखने लगी। भीतर लाल-भभक था। सेठ चिम्मन भाई लंडनवाला लड़की की गांड मारना चाहता था, सो वो लड़की की गांड के पीछे लग-सट गया। मैं हट गयी। दरअसल मैं चिम्मन भाई की गांड से सट कर धक्का मारना चाहती थी ताकि वो कन्या की गांड मजबूती से मार सकें। अब जैसे ही लालाराम ने अपना मोटा सोपारा लंड लड़की की चूत में ठोंका वो बिलबिलाने लग गयी। मगर लाला ठोकता रहा। भचक-भचक की आवाजें आ रही थी और पीछे से सेठ जी भी बिटिया की तबीयत से गांड मार रहे। सच कहूँ तो लालाराम का लंड पूरे 10 इंच का था। वो अभी भी मुश्किल से 7 इंच ही उसकी फुदी मे गया होगा। गुड़िया को और शराब पिलाई तो उसका दर्द कम हुआ व वो तेजी से बेशरम होने लगी। चिम्मन भाई भी पीछे से सटासट 'लिली' की गांड मार रहा था । उसका लंड भी बिटिया की गांड मे कोई 6 इंच सरक चुका था। लिली को थोड़ी और शराब पिलाई तो वो बहकने-चहकने लगी। उसने चला कर सरदार करारा सिंह का लंड पकड़ लिया, और बोली--' 'नाना जी, आप मेरी चूत मारोगे या गांड ?'' भचाक, एक धक्का लगा लालाराम के लंड का बिटिया रानी की चुलबुलाती चूत में की लाला पहलवान का लंड साढ़े 8 इंच गुड्डी की चूत में घुस्स; घुस्स-फुस्स । अब मैंने इस प्यारी गुड़िया रानी को डबल बेड पर लिटा दिया; दोनों ओर से गांड मारने व चूत चोदने की धमचक जारी थी। माने बारी-बारी सेठ व पहलवान दोनों की गांड में अंगुली पेली तो उस से दोनों इतने उत्तेजित हुये की बिटिया रानी की गांड में दोनों के दनदनाते लंड पूरे 10 इंच घुस्स गए। '' आह, आह, आहा आहा; हाये हाँ और चोदो, और चोदो --- हाये मजा आ रहा आहा हूँ हूँ हाँ ''। गुड्डी सिसकारियाँ और चसकारियाँ ले-ले अपने दादा-नानाओं को पक्का अश्लील नंगा मजा दे रही थी, 'लिली'- गुड्डी। इसी वक्त सरदार करारा सिंह ने भी गुड्डी के मुंह, कंठ व हलक मे अपना लौड़ा फंसा-घुसा दिया। फिर कोई 15 मिनट वो अपना लंड गुड़िया से चुंसवाता रहा; फिर उसने अपना अँडकोश उसके मुंह मे घुसेड़ा और कहा,'' बेटी, चाब इसे''। आह, क्या अश्लील नजारा ! चिम्मन भाई और लालाराम जब फारिग हो गए तो वो लिली के पेट पर चढ़ गए अपना-अपना लंड उसके कंठ में ठोंकने-थरकने। वीर्य से गुड़िया का पूरा चेहरा लथपथ था। उदार सरदार करारा सिंह ने बिटिया की गांड में लंड ठोंक दिया; इधर सेठ व लाला एकसाथ ही लिली -गुड़ी की चूत में अपना लौड़ा लगाने लगे; यानि अब गुड्डी की चूत में एकवक्त में ही ''दो -दो लंड'' फनफनाने लगे ; इत्ती-सी मुन्नी और दो-दो लंड ले रही !!!
अब चोदा-बाटी में बारी आयी तीसरी मुन्नी-गुड्डी बिटिया रानी की। वो भी 17 साल की। नाम ' 'लिल्ली' याने 'लोलिता'। लहंगा इतना झीना किउसमें से गुप्तांग दर्शन खुल्लमखुल्ला और चोली -बिन-ब्रा की उसमें से उसके मम्मे दिखे निकले-निकले,उमर कम पर मम्मे भरपूर , रसभरे संतरे। मैंने परिचय कराया, ये है ललिता रानी, डांसर ! she is trained for your every whim, I purposey selected it because I myself like to be fucked wildly, and as dirty as it can be. इस पर सरदार करारा सिंह उन दो से बोला, ' ये ठीक कह रही है क्योंकि पिछली बार इसे जब मैंने चोदा तो वो मजा दिया की क्या बताऊँ। सुन कर सेठ चिम्मन भाई का लौड़ा धोती से निकल कर बाहर आ गया। पहलवान लालाराम बोला, ' क्या कह रही है तू , क्या ये तेरी बेटी है कि . . . ' इस पर सेठ चिम्मन भाई बोला : no, she can't be her daughter as her face is so sweet and different, I can bet. and though she is 17 it looks like much yonger,c***d-alike, a k**.so sweet and innocent, bearing a c***d like face !'.करारा सिंह बोला, 'क्या ये 'गंदा' , 'अश्लील' नाच सकती है ? अश्लील बोल-गा सकती है ?'I said: 'yes, of course. I trained heer for 'lap dance' and ' Special Anal Fuck! She is cute , and can whisper'obscene' as you might wish. . .' इस पर पहलवान लालाराम ने कहा, देख, इस ये जो 'लिल्ली' है तेरी इस से हम अश्लील बोलेंगे, जम कर; फिर मत कहना जो ये मुनिया शरम खा जाए।' उस वक्त चिम्मन भाई चारों टांगों पर जानवर की तरह सरकता हुआ 'लिल्ली' के पास गया। जैसे ही वो पहुंचा 'लीलली' ने अपनी टांगें भरपूरा चौड़ी करदी, सेठ ने अपना मुंह 'लिल्ली' के लहंगे मे घुसा दिया, फिर मुंह ऊपर कर दिया, जैसे वो 'लिल्ली' की चूत प्राईवेट मे देखना चाहता हो। तभी 'लिल्ली' नीचे झुकी और उसके मुंह पर बेठ गयी,' और फुसफुसा कर गाने लगी : '' अय-अय, अय-अय आया जो मजा ; सेठ जी के मुंह मेरी 'चूत' लग जा''। बाहर से हम सबको पता लग रहा था कि सेठ न केवल चूत चाट रहा था बल्कि उसकी जीभ लिल्ली की गाँड व फुद्दी के बीच भी फिसल रही थी। पहलवान लालाराम अब सकते में आ गया, उसने लिल्ली को सेठ से अलग किया और 'उफ़्फ़', इस पहलवान ने लिल्ली को गेंद कि तरह उठा मेरे पास ले आया, वो बोला उझसे ' चल नचवा इसे, नंगी-नंगी ; और तू गा , अश्लील गाना, देखूँ मैं भी मुन्नी-नाच । ' मैं उसे प्राइवेट में ले गयी, कुछ समझाया । सब लोग --- कुल 3 ही तो थे, सभी ने कपड़े पहने हुये पर लंड बाहर ! मुन्नी पहले अपने कपड़े उतारे बिना नाची। गोल-गोल घेरे में , अपनी छातियाँ, चूत और गाँड अचका-मचका के और कमर लचका के। मैं गा रही थी: ' नाना जी मेरा लहंगा उतारो, दादाजी मेरी चोली फाड़ो ; नंगी कर दो मेरी जवानी, चुत में अपना 'लौड़ा' गाड़ो। देखो-देखो देखो, लाला-सेठ-सरदार ; नंगी मेरी गाँड -चूत बड़ी मजेदार। बड़ी मस्तानी है फुद्दी हमारी , कर लो सवारी लाला कर लो सवारी ।'' फिर मुन्नी लहंगा ऊंचा कर गाँड -चूत दिखा-दिखा नाची । मैं फिर गाने लगी: ' देख मुन्नी, देख ये करारा सरदार है, दस इंच लंड नंगा खूब मजेदार है, देख मुन्नी देख लाला बड़ा पहलवान है, इस का भी दस इंच लंड बलवान है।देख मुन्नी इधर चिम्मन भाई तैयार है , सेठ जी का लंड भी प्रचंड मजेदार है। '' इस अर्ध नग्न नृत्य के बीच किसी ने लहंगा तो किसी ने चोली खींच मुन्नी रानी को एकदम निखालिश मादरजात नंगी कर दिया, अब वो चूत की फांक और गाँड की दरार दिखा-दिखा नाचने लगी।, साथ ही चूँचियां निचोड़ के भी दिखा रही थी। इस वक्त कोई उसकी चूत में तो कोई उसकी गाँड में अंगुली घुसेड़ रहा था। मेरा गाना चल रहा था: ' चोद लाला, चोद सेठ, सिख-सरदार चोद पहलवान छोरी , लंड से पछाड़'। '' इस के बाद तो जैसे आग लग गयी। सब इस छोरी पर चढ़ाई करने और इसका मांस नोंचने उतारू हो गए। मुन्नी को छोड़ने के लिए तीन लंड थे , तीनों अलग-अलग भाँत के। पहलवान लालाराम का लंड सबसे बड़ा, वो न केवल लंबा पर मोटा भी बहुत ज्यादा। सेठ जी का लंबा था पर मोटा उतना नहीं, सरदार जी का लंड बड़ा अश्लील, झांटदार । मुन्नी उसकी झांटें सहला-सहला और लंड की किनारी पर हाथ फिरा सरदार जी को मजा दे रही थी; साथ ही दूसरे हाथ से सेठ जी के अंडकोश पर चिकोटी भी काट रही थी। पहलवान मुन्नी के मम्मे मुंह मार ले रहा था, गरम गोश्त मींज-मसल-रगड़ रहा था; फिर चूचियाँ चबाई; दर्द हुआ छोरी को, पर ऐसे में सहन करना ही पड़ता है। फिर सर्वसम्मति से तय हुआ कि जब ये लोलिता इतनी कमसिन है तो क्यों न इसकी गाँड मारी जाए। सो पहले पहलवान लालाराम ने उसे अपनी गोद में बिठाया। उसका लंड 90 डिग्री पर खड़ा था। वो पहले तो लिल्ली की चूतड़ के कई किनारों पर दब-सट रहा था, मगर फिर गाँड़ के छेद में धँसने लगा। फिर लालाराम उठ खड़ा हुआ, सेठ चिम्मन भाई से बोला, ले तू भी इसका जायका ले, बड़ी गरम-गोश्त गाँड है छोरी की। सेठ की गोद में भी वो बेठी । सेठ बोला, ' बेटी, थोड़ा अपनी टांगें हिलाओ,', मुन्नी ने टांगें और जांघें दोनों हिलाईं। इस से सेठ का मजा बढ़ गया। अब सरदार करारा सिंह कि बारी आयी तो वो बोला, मुन्नी ! तुम बस खड़ी हो कर अपनी एक टाँग ऊपर उठाओ, उसने उठा दी । सरदार ने मुन्नी के बुरी तरह से गाल मरोड़ पूछा, 'तुम्हें मेरा लंड पसंद है? बता बेटी? सबने कहा, ' हाँ , बता बेटी !' तो वो बोली, ' अंकल , मुझे तो आप सबके लंड बहोत पसंद है।' पहलवान बोला, ' बेटी, पसंद है तो फिर ये भी बता कि क्या तुझे 'गाँड मरवाना पसंद है ?' सेठ बोला, 'तुझे पता है कि लड़की की गाँड कैसे मारते हैं ?' मुन्नी ने मेरी ओर इशारा किया तो मैंने समझा दिया कि इस पर क्या कहना-करना है'। सो मुन्नी हँस कर बोली, 'अंकल जी आप सब मेरी गाँड मारना चाहते हो न ? सेठ ने कहा 'वो तो ठीक है पर तू अपने मुंह से बोल कि गाँड मारना क्या है और कोई लड़की मर्द से कैसे गाँड मरवाती है ?' ''जी, अंकल ! वो क्या है कि जब मर्द का लौड़ा याने लंड ( फिर मुन्नी ने दो का लंड पकड़ा) ये लंड , जैसे मैं लड़की हूँ तो वो मेरी चूतड़ के बीच एक छेद है, वो , उसे 'गाँड' बोलते हैं, देखो 'ये' ( यहाँ मुन्नी ने बारी-बारी से तीनों की अंगुली अपनी गाँड मे घुसा कर बताई) ; जब ये लौड़ा अंदर, इस्स छेद के अंदर जाता है तो मर्द को मजा आता है और इसे ही 'गाँड मारना' कहते हैं।' करा सिंह ने कहा, 'बेटी, ये, इतना तुझे पता कैसे चला ?' वो बोली, ' अंकल, जब मैं 9 साल की थी तो मेरे सगे ताऊ जी मेरी गाँड मारते थे; जब मैं 11 साल की थी तो मेरे सगे मौसा जी ने मेरी चूत चोदी ; 15 साल कि उम्र में स्कूल के हेड मास्टर जी ने मेरे मुंह मे लंड घुसेड़ अपना वीर्य पिलाया; तब से चस्का है और मैं भी आंटी की तरह मजा लेती-देती हूँ। करारा सिंह ने कहा ' शाबाश, आज तो हम तीनों तेरी गाँड मारेंगे, बस' ।
तीनों मर्दों ने तालियाँ बजाई तो मैं पास आ गयी। सिख सरदार करारा सिंह ने मुझसे कहा, 'अब हम लिल्ली कि बजाएँगे, इस्स लिए तू इसका सिर नीचे और इसकी टांगे जोरदार चौड़ी कर इसकी गाँड हमें दिखा; हम तीनों इसकी मुन्नी-मुन्नी गाँड का मजा लेंगे । मैंने उनसे कहा, 'क्या मैं इस्स की चूतड़ भी चौड़ी करूँ तो सेठ बोला, 'नहीं वो हम खुद करेंगे; दरअसल हम पहले इसकी गाँड़ में अंगुल-अंगूठा घुसेड़ेंगे; फिर हथेली। इसकी गाँड़ मरने से पहले हम अपना पूरा कमीनापन तुम्हें और इसे दिखाएंगे। सबसे पहले पहलवान ने मुन्नी की गाँड़ के छेद में थूका, फिर बाकी दो ने भी। दो ने उसकी गाँद के छेड़ को कस्स के चौड़ा किया, तभी करारा सिंह ने अपनी दो अंगुल घुसेड़ दी। फिर सेठ जी ने एक अंगुल डाली, और पहलवान ने अंगूठा। सेठ ने एक लुब्रिकेटिंग जेल निकाली और उसे भीतर चुपड़ा। उसके बाद सिख सरदार ने अपनी दाढ़ी ऊंची कर अपना लंबा लंड लिल्ली के छेद में पेल डाला। लिल्ली ने' 'ऊँह' की आवाज की, सरदार ने आधा घंटा तक लड़की की गाँड मारी। इसी के साथ लालाराम ने भी छेद में दो अंगुलियाँ धंसा रखी थी। दरअसल ये जुझारू मर्द चाहते थे की लड़की की गाँड के छेद में कम से कम दो लंड तो चले ही जाएँ । पर वो हुआ नहीं। आखिर में एक के बाद एक करते हुये तीनों ने बालिका की गाँड मारी। इस्स के बाद इसी छोरी की चूत को दांतों मे भर कर तीनों ने मजा लिया।
( अगली किश्त मे ये कहानी पूरी होगी। )
8 years ago