मेरे अंतरंग जीवन की हमसफ़र -01
मस्त अंतरंग जीवन की पहली साथी
दोस्तों मैं दीपक अठारह साल की उम्र तक मैं पढाई में ही डूबा रहा l मैं एक मेधावी छात्र था और पढ़ने लिखने में होशियार था मेरे कोई ख़ास दोस्त भी नहीं थे और स्कूल में भी अपने अध्यापको के ही साथ अपनी पढाई में ही अधिकतर ध्यान और समय लगता था l स्कूल ख़त्म करने के बाद और फाइनल पेपर देने के बाद में अपने अपने स्वाभाविक रूप से अकर्मण्य स्वभाव के कारण, मैं अपने जीवन की नीरस दिनचर्या से इस हद तक विचलित हो गया कि मुझे यकीन हो गया कि मैं तीन महीने से अधिक समय तक जीवित नहीं रह सकता , l
मुझे बदलाव की बहुत सख्त जरूरत महसूस हो रही थी l
जब मेरे सब पेपर ख़त्म हो गए तो मैंने मैंने अपनी सभी किताबो को एक कोने में फेंक दिया, l फटाफट मेरा कमरा जो की पहली मंजिल पर था उससे नीचे उतरा और घर से बाहर जाने के लिए निकला , और दरवाजे पर अपने पिता से मिला; l
उनके साथ मेरे फूफा रोज़र और उनके दो बेटे थे, जो मेरी ही उम्र के थे। मुझे लगा अब इनके साथ मैं अपनि दिनचर्या को बदल कर अपनी बोरियत दूर कर सकूंगा और खूब खेलूंगा और मस्ती करूंगा l
दिन के दौरान मेरे पिता ने मुझे बताया कि वह और मेरी माँ वह कुछ दिन के लिए काम के सिलसिले में विदेश ( इंग्लैंड) जा रहे हैं जहाँ पर मेरे फूफा भी रहते हैंl और उनकी अनुपस्थिति में मुझे अपने फूफा के साथ रहना था।, और यह कि एक या दो सप्ताह के लिए हमारे पास रहने के बाद मेरे फूफा और और फूफेरे भाई गाँव में जाएंगे l
अगले दिन मेरे पिता ने मुझे कुछ अच्छी सलाह दी और किन किन चीज़ो का ख्याल रखना है l उनके पीछे से क्या करना है l क्या नहीं करना है कैसे करना है l पारवारिक परंपरायए सब समझाया गया और इस हिदायत के बाद की अपने फूफा की सब बात मानना और मुझे आशीर्वाद देने के बाद, लंदन की और रवाना हो गए ।
मेरे फूफेरे भाई, रोबोट ( बॉब) और टॉम जिनसे मेरी अच्छी बनती थी l रोबोट ( बॉब) और टॉम दोनों अँगरेज़ थे क्यंकि मेरे फूफा भी अँगरेज़ थे lऔर लगभग हर साल कुछ दिन के लिए हमारे पास रहने लंदन से आते थे , और मुझे उनके साथ खूब मजा आता था l पहले जब भी मिलते थे तो दोनों बहुत सीधे और सरल लड़के थे लेकिन इस बार दोनों बहुत शैतान या यु कहिये बदमाश हो गए थे l
, मुझे वो दोनों अब दो जंगली घोड़ो से लगते थे, जो कभी भी किसी देश के गाँव के सीधे सादे निवासियों पर खुले छोड़ दिए गए हो , हर शैतानी करने के बाद पकडे जाने पर मुझ पर डाल देते थे और खुद साफ़ बच निकलते थे l दोनों सभी प्रकार के कुचक्रों बनाने में बहुत निपुण और विद्वान साबित होते थे, ।
हमारे फूफा जिन्हे कुछ व्यावसायिक और अन्य व्यस्तता के कारण हमारे आचरण की देखभाल निगरानी करने का समय नहीं था इसलिए बॉब और टॉम को एक तरह से पूरी छुट मिली हुई थी । वह दोनों दिन भर उछल कूद मचाते रहते थे . जिसे देख कर मैं भी मजे लेता रहता था . और कभी कभी उनके साथ धमा चौकड़ी मचा लेता था l
फिर दो दिन बाद फूफा हमें लेकर गाँव में हमारी पुरानी पुश्तैनी महल नुमा घर में ले गए l वहाँ पर भी बॉब और टॉम की उछल कूद जारी रही क्योंकि फूफा जमीन जायदाद के सारे मसले देखने में ही व्यस्त रहते थे l और कोई नौकर चाकर डर के मारे बॉब और टॉम की शिकायत नहीं करता था क्योंकि मैं भी उनमे जाने अनजाने शामिल रहता था ll lवैसे हम सब के अलग अलग बड़े बड़े आलिशान कमरे थे फूफा किसी काम से पास के गाँव में अपने किसी मित्र से मिलने चले गए और हमे पता चला वह आज रात वापिस नहीं आएंगे l
शाम को मैं बॉब की तलाश में मेरे फुफेरे भाई बॉब के कमरे में गया, दरवाजा खोलने पर, मैंने जो कुछ देखा, मैं उस पर पूरी तरह से चकित था। वहाँ बिस्तर पर टॉम लगभग नंगा एक बेहद खूबसूरत भगवान् की बनाई हुई लाजवाब मूर्त के जैसी गोरी गुलाबी गालो वाली कमसिन लड़की की बाहों में खोया हुआ था l जिसके कपडे हमारी नौकरानियों जैसे थे l
जब मैंने कमरे में प्रवेश किया तो वहां बॉब उस खूबसूरत कन्या के ऊपर एक तंग अंतरंग आलिंगन में जकड़ा हुआ लेटा हुआ था l लम्बी खूबसूरत सफेद टांगों का एक जोड़ा उसकी पीठ के ऊपर से पार हो गया था, और उनके शरीर की थिरकन, हिलने और स्पीड को देखकर मुझे लगा कि वे दोनों असीम आनंद ले रहे हैं जो एक तरह से पूरी तरह से संतोषजनक था और दोनों उस आनद दायक क्रिया में जिसमे वह पूरी तरह से डूबे हुए थे कि उन्हे मेरे आने का कुछ पता नहीं चला की कब मैंने कमरे में प्रवेश किया है।
हालांकि, तीन दिनों के दौरान जब मेरे फूफेरे भाई मेरे साथ थे, उन्होंने भद्दे भद्दे चुटकुले और असभ्य बातचीत करके, लड़किये के पवित्र होने की जिस सख्ती के साथ मेरी माँ ने मुझे पाला गया था उन सभी मेरी पूर्व धारणाओं को उखाड़ फेंका था, मुझे कभी भी लड़कियों की संगत करने की अनुमति नहीं थीl
मैं अपने माँ बाप की एकलौती औलाद हूँ l यहाँ तक के मेरी देखभाल करने वाले भी पुरुष नौकर ही थे l हालाँकि मेरे पिताजी की एक से अधिक पत्निया रही है जिनसे मेरी कुछ सौतेली बहने हैं पर मुझे हमेशा उनसे और मेरी सौतेली माओ से दूर ही रखा गया था l. शायद सौतेलेपन के वजह से माँ के मन में कुछ डर या पूर्वाग्रह थे l बॉब और टॉम की भी बहने जब हमारे घर आती थी मुझे उनसे दूर ही रखा जाता था l यहाँ तक की मेरी किसी महिला से कोई ख़ास बातचीत भी नहीं होती थी और मेरा स्कूल भी सिर्फ लड़को का ही था जिसमे कोई महिला टीचर भी नहीं थी l
बिस्तर पर दोनों को इस तरह से देखकर मैं इतना चकित हो गया कि मैं दरवाजे पर खड़ा उन्हें तब तक देखता रहा जब तक कि बॉब ने हिलना बंद नहीं कर दिया उसके बाद वह कुछ देर शांत होकर उस खूबसूरत लड़की के ऊपर ही लेट गया और उसे चूमने लगा फिर उसे ने खुद को लड़की से दूर कर लिया । वह उठा , उसकी पीठ मेरी और थी जबकि वह सुन्दर खूबसूरत अधनंगी लड़की अभी भी अपनी आँखें बंद करके लेटी हुई थी , उसका पेटीकोट और कमीज ऊपर की और था जिससे उसके बड़े बड़े सुडोल स्तन मुझे ललचा रहे थे लड़की का बदन इतना सुन्दर खूबसूरत आकर्षक उत्तेजक होता है ये मुझे उस दिन ही पता चला था
उस लड़की की टाँगे खुली हुई थी वह हिली और उसने अपनी जांघों को अलग किया l मेरी आँखे उसके सुन्दर गोर सुडौल बदन को टकटकी लगा कर देखने लगी और उसके गोल सफेद स्पॉट पेट का मुआयना किया , जिसके नीचे के हिस्से और दोनों जांघो के बीच की जगह को गहरे काले घुंघराले बालों की एक बड़ी वृद्धि,ने कवर किया हुआ था ,
मैंने ऐसा अक्सर लड़को से सुना था, लेकिन पहले कभी नहीं देखा - एक योनी; जो घुंघराले बालों के ताले के बीच छुपी हुई थी , उसकी जांघो के खुलने से मैंने उस छुपी हुई प्रिय स्वादिष्ट गुफा जो की एक गर्म भत्ते की तरह थी उसके बीच के चीरे के आसपास मैं दो मोटे और रसीले होंठों को थोड़ा सी खुली हुई थी की पहली झलक देखि , जिसमें से थोड़ा सा सफेद दिखने वाला झाग निकल रहा था।
मैंने जो कुछ देखा उससे मेरी संवेदनाएँ भ्रमित थीं, और अजीब सी भावनाएँ, जो मुझ में जग गई थीं,
मैं उस खूबसूरत नज़ारे को और पास से देखने के लिए बिस्तर की ओर आगे बढ़ा। जिस क्षण मेरे कदम को सुना गया, उस लड़की ने खुद को बेडकवर के नीचे छुपा लिया, जबकि बॉब भी पलटा और मुझसे मिलने आया, और मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर मुझे बिस्तर तक ले गया, कहा, -
मेरे भाई दीपक तुमने क्या देखा है? आप कितने समय से कमरे में हैं?" मैंने जवाब दिया और उसे बताया कि मैंने उनके पूरे पराक्रम और प्रदर्शन को देखा है। जब तुमने सब देख ही लिया है तो फिर कैसी शर्म कहते हुए बॉब ने उस लड़की को कवर उतार कर फेंक दिया, तो उसने अपने स्तनों को एक हाथ से और एक हाथ से अपने चहरे को छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगी और मैं उस खूबसूरती के मुजस्मे को घूरता ही रहा और मेरा हाथ अनायास ही मेरे लंड पर चला गया जो की मुझे कड़ा होता हुआ महसूस हुआ और बाब ने उसे बैठे हुए मुद्रा में उठाते हुए, एक हाथ उसकी कमर पर लपेटते हुए कहा, -
" दीपक भाई , क्या तुमने कभी किसी लड़की के संग का आनंद लिया है l तो मैंने कहा नहीं कभी नहीं l तो बॉब बोलै तुमसे बाते करते हुए मुझे अंदाजा तो था के तुम बिलकुल अनारी हो इस मामले में ,, तुमने एक सुंदर लड़की की बाहों में लेकर प्यार करने से प्राप्त होने के लिए सुख का स्वाद कभी नहीं लिया हैं, तुम्हे नहीं पता इस आनद के आगे दुनिया के सभी सुख और आनंद फीके हैं
तुम ये भी नहीं जानते कि एक खूबसूरत लड़की की बाहो में खो जाना उसे हासिल कर लेना , उसे प्यार करना और उसका प्यार पाने के प्रलोभन का विरोध कर पाना एक पुरुष के लिए कितना कठिन है और पुरुष अपनी पूरी शक्ति और साधन का उपयोग करके एक खूबसूरत स्त्री को हासिल करने के लिए अपना सब कुछ भी दाव पर लगा देता है l इस शारीरिक भूख को रोक सकने की शक्ति बहुत कम लोगो में होती है l
फिर उस लड़की का हाथ पकड़ कर चूमते हुआ बोला lऐसा कौन है जो इस सुंदर, प्यारी, आकर्षक हुस्न की मालकिन हसीना को इंकार कर सकता है l मैं क्या चीज हूँ l इन्होने मुझे कल रात अपने कक्ष में मुझे आमंत्रित करने के लिए सम्मान दिया गया था, लेकिन मैं इंतजार नहीं कर सका और मैंने आज ही अपने कक्ष में आमंत्रित कर इनके शिष्टाचार का जवाब दिया जो इन्होने सहर्ष स्वीकार कर लिया , और ये सब उसी का नतीजा है । "
बॉब के साथ वह खूबसूरत हसीना मेरी बहन रूबी थी l तो मने रूबी को अपना पास खींच कर उसका मुँह चूम लिया और उसकी कमर में हाथ डाल कर बोला वह खूबसरत हसीना जिसे मैंने पहले बार बेपर्दा देखा था वह रूबी थी .।
. बॉब ने मुझसे पुछा क्यों भाई ये बहुत आकर्षक और खूबसूरत है न तो मैंने उत्तर दिया, "हाँ, वह बेशक ये बहुत ही सुन्दर और आकर्षक है," और लिंगों के संयोजन से प्राप्त सुखों को एक अंतर्दृष्टि प्राप्त करने की इच्छा महसूस करते हुए, मैंने अपने हाथ रूबी के नंगे घुटने पर रखे, जो अभी भी बिस्तर के किनारे पर बैठी थी बिस्तर, उसके कपड़े उसकी योनी और जाँघों को देखने की असफल कोशिश कर रहे थे, और उसने अपने क़मीज़ के नीचे खिसका दिया था, जिससे वह उन छाये हुए बालों के पहाड़ पर आराम कर रही थी , जो अपने नीचे उस स्वादिष्ट योनि की छुपाये हुई थी । मेरे हाथ धीरे धीरे उसकी रस भरी योनि की और बढ़ने लगा और धीरे धीरे रूबी को अपनी और खींचने लगा l
वही पता नहीं मुझे क्या हुआ के अनायास ही मेरे हाथ रूबी के घुटनो पर चले गए और उसकी योनि की और बढ़ने लगे लेकिन बॉब ने मुझे रोकते हुए कहा, "मुझे माफ कर दो, मेरे भाई , लेकिन रूबी फिलहाल मेरी है , कम से कम वर्तमान के लिए, लेकिन जैसा कि मैं देख रहा हूं कि आप प्रेम की देवी के रहस्यों में खुद को डूबा देने के लिए उत्सुक हैं त्यार हैं , मुझे लगता है कि रूबी की मदद से मैं आपको रात के लिए एक साथी खोजने में सक्षम हो सकता हूं, उसने रूबी की तरफ देखते हुए कहा क्या हम मेरे भाई के लिए एक साथी नहीं ढूंढ सकते? "।
तो रूबी वहां एकदम से कूद कर आपमें पैरो पर खड़ी हो गयी और मुस्कुराते हुए बोली , बहुत बढ़िया "हम महाशय दीपक को मेरी छोटी बहन रोजी से मिलवा देते हैं और मुझे यकीन है कि मेरे खुद की तुलना में रोजी बहुत सुंदर लड़की है, कुमार दीपक रोजी आपको बहुत अच्छी लगेगी lउसकी मुझ से बड़ी सुडोल और गोरो गोरी स्तन हैं, "उसने फुसफुसाते हुए मेरे कजिन बॉब के कानो में कुछ कहा l तो बॉब ने मुझे बधाई देते हुए कहा मेरे भाई तुम बहुत किस्मत वाले हो तुम्हे बहुत बहुत बधाई अभी मुझे रूबी ने बताया है . तुम्हारी पहली साथी भी तुम्हारी तरह ही कुंवारी है तो मुझे रूबी ने भी मुबारक दी और अपनी गोल सफेद ग्लोब गोलाइयों की जोड़ी को कवर किया कहा, मैं अपनी आँखों से लालच से खा रहा था। , "मुझे यकीन है ,जब हम उसे आज रात लाएंगे तो आप रोजी से मिल कर प्रसन्न होंगे, ।"
तो मुझसे बॉब ने पुछा तुम चुदाई के बारे में क्या जानते हो l तो मेरा जवाब सुन कर वह बोलै तुम्हे बहुत कुछ सीखाना पड़ेगा और बोलै रूबी मेरी मदद करो दीपक को कुछ सेक्स सीखा देते हैं
बॉब बोलै तो दीपक तुम अब ठीक से चुदाई देख और सीख लो.
बॉब रूबी को चूमने लगा. फिर बॉब उसे किस करने लगा और उसके और अपने सारे कपडे उतार डाले बॉब उसके बूब्स दबाने लगा और रूबी उसके खड़े लण्ड को सहलाते हुए अपनी चूत पर घिसने लग गयी.
और फिर बॉब अपना लण्ड रूबी की चुत में घुसा कर दनादन धक्के लगाने लग गया फिर एक दो आसान बदले और कुछ देर बाद झड़ गया. l रूबी ने मुझसे वादा किया कि वह रात को अपनी बहन को मेरे कमरे में ले आएगी तो मैंने भी वादा किया की मैं भी उसका और बॉब का राज गुप्त रखूँगा और जो मैंने देखा था उसका किसी से भी कोई जिक्र नहीं करूंगा, और उन्हें वही छोड़ कर अपने कमरे की और जाने लगा
बॉब रूबी के कान में कुछ फुसफुसाया और उसके बाद अपने कपडे उठा कर रूबी भाग गयी और जाते हुए बोली रात के खाने के बाद मैं रोजी को ले कर आती हूँ l उसके बाद बॉब ने मुझे सेक्स के बारे में कुछ और टिप्स दी और सफाई करने की जरूरी हिदायते दी और उसके बाद मैं अपने कमरे में आ गया और नहा धो कर सफाई कर के जल्दी जल्दी रात का खाना खाया
रात को जल्दी से अपने कमरे में जाकर मैंने एक घंटा इंतज़ार के बुखार में बिताया तब रूबी मेरे कमरे में आयी , और मुझसे बोली आप कुछ देर के लिए अपने भाई बॉब के कमरे में चले जाओ तब तक मैं आपका कमरा त्यार कर देती हूँ इतनी देर में रोजी भी आ जायेगी फिर जब मैं बुलाऊंगी आप आ जाना
लगभग आधे घंटे में रूबी मेरे पास आयी और मुझे मेरे कमरे में ले गयी वहां कमरे का नज़ारा बदला हुआ था l बिस्तर फूलो से सजा हुआ था मेरे अंदर आते ही रूबी की बहन रोजी कमरे में दाखिल हुई मैंने रोजी की तरफ हाथ बढ़ाया रोजी एक सबसे खूबसूरत लड़की थी, रोजी ने एक दुल्हन की गुलाबी पोशाक पहन रखी थी
मैं उसे एकटक देखता रहा और जिस पल वह कमरे में दाखिल हुई और दरवाजा बंद किया गया, मैं आगे की ओर बढ़ गया , उसे अपनी बाहों में पकड़ लिया, और उसे एक सोफे पर ले गया, जहां मैं बैठ गया और उसे अपनी तरफ खींच लिया रोजी ने एक दुल्हन की पोशाक में अपना चेहरा नक़ाब से ढक रखा था,, मैंने उसका हाथ पकड़ कर चूमा और अपनी जेब से एक अंगूठी निकाल कर उसे तोहफे के तौर पर दी और उसे कहा ये हमारे पहले मिलान की निशानी के तौर पर तोहफा कबूल करो मेरी रोज l उसने अपना हाथ आगे बढ़ा दिया और मैंने उसे अंगूठी पहना दी
मैंने उसका नक़ाब हटाया और उसका खूबसूरत चेहरा देखकर मुझसे रुका न गया और उसके होंठ चूमने लगा मैंने वो रुमाल जो उसके स्तनों को ढक रहा था उसके पिन को खोला तो उसके बड़े गोल सुडोल उरोज मेरे सामने उजागर हो गए मैं उसके स्तन चूमते हुए अपनी बाहों में फिर से उसे कस कर जकड लिया । मेरी निष्ठुरता और कुछ हद तक अपने आप को मेरे आलिंगन से मुक्त करने के लिए रोजी संघर्ष करणे लगी और बोली प्लीज मुझे छोड़ दो l तब उस कमरे में मौजूद रूबी जिसे मैं लगभग भूल ही चूका था वह बोली
कुमार!! रोजी इससे पहले किसी पुरुष के साथ अंतरंग नहीं हुई है और कुंवारी है इसलिए आपको थोड़ी गंवार या अनारी लग सकती है l लेकिन आपके साथ रहने के लिए बहुत इच्छुक उत्साहित है और वो आपको जरूर खुश करेगी ऐसा मेरा यकीन है , मुझे पक्का भरोसा है, वह आपकी सारी इच्छाएं पूरी करेगी ; और आप दोनों बहुत मजे करोगे ये उसका पहली बार है इसलिए थोड़ा आराम से और प्यार से कीजिये क्यों मेरी बहन रोजी क्या ऐसा नहीं है,?
जिस पर रोजी ने एकदम से जवाब दिया, "ओह हां," दीदी lऔर मेरी छाती में अपना चेहरा छिपा लिया। कसम से उसकी इस अदा पे मैं एकदम फ़िदा हो गया और उसका चेहरा ऊपर कर उसके माथे पर एक किस किया और उसे अपनी छाती से लगा लिया और बोलै मेरी जान घबराओ मत अब आराम से करूंगा . क्या करूँ तुम्हे देख कर मुझ से रुका ही नहीं जा रहा .
रूबी ने मुझे बताया कि चूंकि शराब जोश और हिम्मत को को बढाती है प्रेम की उत्तेजना को भी बढाती है, वह बोली वह मेरे लिए कुछ शराब ले कर आती है तो मैंने कहा रूबी तुम चिंता मत करो शराब हर कमरे में उपलब्ध है क्योंकि मेरे पिताजी और फूफा सब शराब के शौकीन है फिर वो रोजी से बोली कुमार को अच्छे से खुश करो मेरी बहन और उन्हें अच्छी शराब जितनी वो पी सके उतनी पिलाओ और उनकी सब बात मानो फिर वह गयी और एक ट्रे में कुछ शराब के बोतल, केक नमकीन कुछ फल मिठाई इत्यादि ले आयी और मेरे पास आ कर दो गिलासों में शराब डाल कर मुझे एक छोटी बोतल देते हुए बोली मेरे कान में फुसफुसाई आप रोजी को शराब में इस ख़ास देसी दवा की कुछ बूंदे डाल कर पीला दे और आपके गिलास में भी मैंने कुछ बूँद डाल दी है इससे आपका आनंद बढ़ जाएगा l फिर मजे करिये और शुभ रात्रि बोल कर वह दरवाजा बंद कर चली गयी
जब रूबी चली गयी तो मैंने अंदर से दरवाजा बंद कर दिया, फिर एक टेबल को बिस्तर का पास खींचा और रोजी को बिस्तर पर ले गया और खुद उसके पास बैठकर, मैंने पहले बिना रोजी के साथ कोई स्वंतंत्रता लिए आगे धीरे धीरे आगे बढ़ने का फैसला किया और अपने सभी प्रयास आराम से करने का प्रयास किया, मैं उसकी प्रशंसा करने लगा मैं उसे कहा तू मुझे बहुत अच्छी लगी तुम बहुत अच्छी हो तो वह पूछती आप को मुझ में क्या अच्छा लगा तो मैंने कहा तुम्हारे रास भरे ओंठ मन करता है बस इन्हे चूसता रहूँ तो वह बोली तो फिर किसने रोका है और मेरे ओंठो पर उसने अपने ओंठ रख दिए l और मैंने उसके रास भरे ओंठो पर चुम्बन कर दिया ऐसे ही उसकी तारीफ करता रहा और उसका पूरा चेहरा गाल नाक माथा आँखे धीरे धीरे सब चूमते चूमते चाट गया
मैंने उसे शराब का गिलास दिया तो वह बोली मैं नहीं पीती तो मैंने उसे एक घूँट पीने को कहा तो उसने पि ली और बोली अब आप पीओ तो मैं पहले शराब का घूँट भरता फिर अपने होंठ उसके ओंठो से लगा कर उसे अपने ओंठो से शराब पिलाने लगा मैंने उसको लगभग आधा दर्जन गिलास शराब पिलाई और उसके साथ खुद भी पि ।
कुछ देर बाद दवा और दारू के असर से वह बहुत स्वतंत्र रूप से नशे में थी, तो उसके चरित्र की स्वाभाविक जीवंतता उसके खुले और मुक्त वार्तालाप में दिखाई देने लगी। मैंने फिर उसे कहा तुम बेहद सुन्दर हो l तो उसने कहा आपको मेरा क्या सबसे सुन्दर लगता है तो मैंने कहा उसका हर अंग बेहद सुन्दर है और मुझे प्रिय है तो वह बोली तो सबसे ज्यादा क्या प्रिय है तो मैंने उसकी कमर और गर्दन के चारों ओर अपनी बाहों को रखा, और उसकी छाती को अपने छाती के पास दबाने लगा , और उसको नरम गुलाबी ओंठो पर गरमा गर्म चुंबन करने लगा फिर एक हाथ उसकी छाती पर फिराते उसके मुलायम बदन को महसूस कर रहा था और उसके गोल गोल बूब्स को सहला दबा रहा था।
तो उसने फिर पुछा कौन सा अंग सबसे सुन्दर लगा तो मैंने कहा वही तो जांच रहा हूँ l तो वह बोली सिर्फ जांचेंगे या देखेंगे भी उसका ये प्रश्न सुनने के बाद मेरे ओंठ उसके ओंठो से जुड़ गए और लगभग 10-१५ मिनट मई उसे किश करता रहा इस बीच मेरे हाथ उसकी दुल्हन के पोशाक के ऊपर से ही उसके पूरे बदन को सहला और दबा रहे थे l लेकिन उसके बड़े बड़े उरोज मुझे ललचा रहे थे तो मैंने पीछे से उसकी ड्रेस की डोरिया खींची और उसके स्तन बहार निकाल कर उन्हें पहले चूमा फिर मसला दबाया और चूस चूस कर दोनों स्तन लाल कर दिए क्या बड़े बड़े गोल सुडोल स्तन थे
इस तरह धीरे धीरे आगे बढ़ता हुआ , उसकी स्तन दबाने के बाद मैं रुक गया और उसके क़मीज़ के नीचे से एक हाथ डाला , उसके कपड़े उसके घुटनों पर चढ़ा दिए। उसकी टांगो और जंघा को सहलाते फिर उन्हें निचोड़ने लगा और उसके पैरों के साथ खेला , मैंने अपना हाथ उसकी जाँघ पर तब तक सरकाया, जब तक कि मेरी उंगलियाँ उसकी कुंवारी चुत के द्वार पर हावी हो गई । उसने पैंटी नहीं पहनी हुई थी उसके मुँह से इस्सस निकली और मेरे ओंठ जोर से चूमने लगीl
रोजी की चूत बिलकुल सफाचट थी l बालो का नाओ निशाँ नहीं था बिलकुल मुलायम चिकनी नरम l जब मैंने हाथ फिराया तो रोजी बोली दीदी ने आज ही साफ करवाई है ख़ास आपके लिए
उसकी रेशमी चूत से खेलते हुए अपनी उंगलियों को घुमाकर चूत के मध्य के लकीर पर फेरते हुए ऊँगली को उनके माध्यम से घुमाते हुए, मैंने अपनी एक उंगली को थोड़ा नीचे लेजाते हुए उसकी गांड के छेद को छेड़ते हुए हलके से गांड में पिरो दिया वह कराह यही आआह आह प्लीज यहाँ नहीं l दीदी कहती है यहाँ बहुत दर्द होता है l, फिर दुबारा उसकी योनि के होंठों के बीच ऊँगली की नोक डालते हुए, उसकी चूत के दाने को ढूंढ लिया मैंने उसे इतनी अच्छी तरह से छेड़ा कि वह अपनी जगह पर उछलने लगी और बोली अब इंतजार नहीं होता प्लीज अब कुछ करो l मैं इसे अब बर्दाश्त नहीं कर सकता। मैं आग पर था; मेरी नसों में से खून उबल रहा था। मेरा लंड फुल टाइट हो गया
मैंने उसे जमीं पर पैरों पर खड़ा किया, और उसके कपडे उतारना शुरू कर दिया, मैंने जल्दबाजी में उसके कपड़े फाड़ दिए, जब तक कि वह मेरे सामने पूरी तरह से नग्न नहीं हो गयी l वाह भगवान् क्या नज़ारा था हुस्न का मेरी आँखे के सामने क्या गोल सुदृढ़ सुडोल स्तन, गोरा मखमली बदन , पतली बलखाती कमर , स्पॉट पेट सुन्दर नैन नक्श , मीठी आवाज , बड़ी बड़ी हिरणी जैसी चंचल आँखे गुलाबी होंठ, हल्के भूरे रंग के लम्बे बाल, नरम चूतड़, और फिगर 36-24-36 का था., तीखी नुकीली नाक , बड़े गोल नितम्ब l लंबी सुगढ़ टाँगे सुन्दर हाथ ,, सब कुछ बेहद सुन्दरl पूरा शरीर सांचे में ढला हुआ बड़े बड़े स्तन इतने गोल और दृढ़। मैं उन्हें दबाने लगा तो कभी चूमने लगा फिर उसके निपल्स को मुँह में ले कर चूसने लगा उसे इस हालात में देख कर मैं सब भूल कर उसे जोर से काटने लगा तो वह ओह्ह्ह आह करने लगी
उसकी ऐसे हालत देख मेरे भी लंड का तनाव इतना ज्यादा हो गया और मुझे लगा मेरा लंड मेरे कपडे फाड़ कर बहार निकल आएगा और फट जायगा तो मैंने अपने सब कपडे ऐसे उतार फेंके जैसे उसमे से कांटे चुभ रहे हो और पूरा नंगा हो होकर उसे पकड़ कर अपने शरीर से चिपका लिया और मेरा लंड उसकी चूत के द्वार पे अपना रास्ता खोजने लगा मैं उसका पूरा बदन महसूस कर रहा था l
हम दोनों कामाग्नि में जल रहे थे l मैंने अपने हाथो से उसे अपने छाती पर दबाता l उसके स्तन कठोर हो मेरी छाती में चुभ रहे थे l उसने भी अपने हाथो से मेरी पीठ को अपने बड़े बड़े स्तनों पर दबा दिया था l तो मैं उसके ओंठो की किश करने लगा और मेरे हाथ उसके उसकी कमर पर फिसलते हुए रोजी के नितंबो की अपनी और दबाने लगे l ऐसा लग रहा था दोनों एक दुसरे में समां जाना चाहते हो
आकर्षित, उससे चिपका हुआ उसके नग्न शरीर को महसूस करते हुए मैं अपने घुटनों पर झुक कर उसके सुस्वाद योनि पर प्यार भरे चुंबन किये । मैं पूर्ण उन्माद में था, और मेरे चूमने से वह भी जल बिना मछली के तरह तड़पने लगी और बोली प्लीज अब रुका नहीं जा रहा कुछ करो मेरे राजा
और उसके शरीर को मेरा करने के लिए, मैंने कांपती हुई लड़की को अपनी बाहों में उठाया, और उसे बिस्तर पर ले गया।
मैंने एक तकिया उसकी शानदार चूतड़ों , गोल गांड को आराम करने के लिए, नितम्बो के नीचे रखकर मैंने उसे नीचे की तरफ बिस्तर पर बिठाते हुए लेटा दिया। मैंने उसकी जाँघों को चौड़ा किया, और लंड पूरा खड़ा था तो उसने एक बार अपना हाथ लंड पर फेरा तो लंड जैसे उसके हाथ के छुअन से पूरा भड़क गया आपका लंड सचमुच काफी बड़ा है l मेरे लंड का साइज 7 इंच है .
और उसकी चूत में जाने को लिए बिलकुल त्यार था , मैंने उसकी चूत पर लैंड की एक बार लगाया उसके चूत के दाने पर लैंड की दो तीन बार रगड़ा तो वह बोली प्लीज अब तडपाओ मत। मुझे बॉब ने बताया था रोजी कुंवारी है आराम से करना थोड़ा दर्द होगा जब वो पूरी तरह तैयार हो उससे पूछ कर ही अंदर घुसना
मैंने लंड चूत पर घिसते हुए उससे पुछा तुम त्यार हो l वह बोली हाँ बस जल्दी करो अब बर्दाश्त नहीं हो रहा l मैंने कहा दर्द होगा तो वह बोली मैं सब सह लूंगी अब तुम अब आ जाओ मुझ में समा जाओ मैं सब सह लूंगी मुझे भी दीदी ने बताया था
मैंने अपनी उँगलियों के आगरा भाग की मदद से साथ, मैंने उसकी टाइट चूत के होठों को बहुत मुश्किल से अलग किया , और अत्यंत परेशानी के साथ अपने कुंवारे लंड के लंडमुंड को उसके कुंवारी योनी के प्रवेश द्वार में डाला।
जैसे ही मैंने महसूस किया की लंड ठीक जगह रखा गया है मैंने थोड़ा जोर लगा कर लंड को चूत पर दबाया और जोर से दबाता हूं, लेकिन रोजी की चूत इतनी टाइट थी के लंड अंदर जाने की जगह वही से नीचे फिसल गया. मैंने लंड को पकड़ा फिर चूत के द्वार पर घिसा और थूक लगा कर गीला कियाl मैंने दो तीन बार ऐसा किया पर अंदर जाने में सफलता नहीं मिली l तो मैंने कहा रोजी लगता ज्यादा ताकत लगानी पड़ेगी तो तुम त्यार हो तो उसने आंखे झपक कर अपनी स्वीरकृति दे दी
फिर से चूत को हाथो से सहलाया चूत के दाने को लंड से मसला फिर उंगलियों की मदद से ओंठो को फिर अलग किया तो रोजी ने भी हाथ से मेरा लंड पकड़कर उसे अपनी चूत के छोटे से छेद पर लगा कर अपने दुसरे हाथ से मेरे नितम्ब दबा कर इशारा किया तो मैंने भी पूरे जोर से एक धक्का दिया इस बार लंड चूत के अंदर जाने में कामयाब हुआ तो आधा लंडमुंड अंदर चला गया और साथ ही साथ रोजी की आह भी निकली l पर उसने लंड को है छोड़ा और आँखे झपक कर मुझे इशारा किया . इस बार मैंने लैंड पर फिर लम्बे समय तक दबाब दिया मेरे भयंकर दबाब देने से लंड को चूत के अंदर का रास्ता मिल गया, और लंडमुंड का सर पूरा अंदर चला गया, मैंने एक बार फिर जोर से धक्का दिया और मेरा लगभग आधा लंड चूत के झिली को चीरता हुआ रोजी का कुंवारापण भंग करता हुआ अंदर चला गया,
उसकी चीख निकली लेकिन न मैंने न रोजी ने उसे रोकने की कोई कोशिश करि l
रोजी की चूत बहुत टाइट थी. मुझे खुद से लगा कि मेरा लंड उस गुफा में फंस सा गया हो, और चूत ने कस कर जकड लिया था मेरी भी चीख निकल गयी थी.
बेचारी रोजी ने अपने कौमार्य भांग में होने वाले दर्द को पूरी हिम्मत के साथ सहा था अपने दांतों के बीच बिस्तर की चादर रखते हुए, हो रहे दर्द के मारे होने वाले रुदन को दबाने के लिए, जबकि उसके हाथ मेरे शरीर को उसके पास ले जाते थे, या यहां तक कि अपने कौमार्य को भंग करने के मेरे जानलेवा इरादों की सहभागी बनते हुए मेरे लंड को भी अपने हाथो से संभाला था और बाकायदा मदद करि थी ।
हम दोनों एक साथ चिल्ला रहे थे 'ऊह्ह्हह्ह मर गएl' मुझे लंड पर गर्म गर्म स्राव महसूस हुआ जैसा की मुझे बॉब ने बताया था ये झिली फटने पर निकलने वाला खून था इसके साथ ही मेरा भी कुंवारापण भंग हो गया लेकिन इस तरह की रोजी की चूत की गुफा में मेरे लंड के लिए रास्ता बन गया था मैंने थोड़ा सा लंड पीछे किया और फिर एक जोर दार शॉट लगा कर पूरा लंड जड़ तक अंदर पैबस्त कर दिया और प्रेम के जलाशय की बाढ़ ने रास्ता दे दिया, और रोजी झड़ गयी और मेरा लंड रोजी के प्रेम के जल से भीग गया ,
उसने चेहरे से ही लग रहा था कि उसे बहुत दर्द हो रहा है. मैंने रोजी को धीरे धीरे चूमना और सहलाना शुरू कर दिया. तो रोजी के आँखों में आंसू आ गए वह बोली आराम से धीरे धीरे नहीं कर सकते थे क्या तो मैंने कहा धीरे करने से अंदर ही नहीं जा रहा था इसलिए ज्यादा जोर लगाना पड़ा l मैंने उससे पुछा बहुत दर्द हो रहा है क्या हाँ हो तो रहा है
मैं बोला- मेरी रोजी मेरी जान ... थोड़ी देर में सब ठीक हो जाएगा. वह बोली प्लीज अब तब तक मत हिलना जब तक मैं इशारा न करून
मैंने उसे लिप किस किया. मैं उसे लिप किस करता रहा. मैंने उसके लिप्स पर काटा, तो उसने मेरे लिप्स को काट कर जवाब दिया. . तो मैंने अपने ओंठ उसके ओंठो से जोड़ कर उसे लिप किश करने लगा और मेरे हाथ उसके बूब्स के साथ खेलने लगे और एक हाथ उसके निप्पल मसलने लगे l फिर मैंने उसकी चूची सहलानी और दबानी शुरू कर दी. वह सिसकारियां ले मजे लेने लगी lवो इस वक्त इस चूमाचाटी में अपना दर्द भूल चुकी थी कुछ देर में रोजी का दर्द कम हो गया
फिर उसने अपने नितम्ब ऊपर उठा कर और मेरे नितम्बो को अपने ऊपर दबाया और पके झपक कर मुझे इशारा किया . तो मैंने धीरे से लंड भहर खींचा और एक बार फिर जोर लगा कर अंदर घुसा दिया .
मुझे महसूस हुआ कि मेरे लिंग को रोजी ने अपनी योनि रस ने भिगो दिया था, जिसकी वजह से लिंग आसानी से अन्दर और बाहर हो पा रहा था.
फिर कुछ देर में ही वो भी मेरा साथ देने लगी. अब उसकी चुदाई में दोनों को जन्नत का मज़ा आ रहा था. कुछ ही देर में रोजी ने भी स्पीड पकड़ ली थी. वो जोश में आ गई थी. और मेरे शॉट के साथ ताल मिलाते हुए अपने नितम्ब हिलाने लगी
अब वो मजे से चिल्लाने लगी थी- अहाआअ ... राआजा ... मर गई ... आईसीई ... और जोर से ... और जोर से चोदो ... बहुत मजा आ रहा है आ जाओ मेरे अंदर समा जाओ l. मेरी चूत को अपने रस से भर दो , ... आआआआ और ज़ोर से ... उउउईईईई माँ ... आहहहांl
उसकी इन आवाजों ने मुझे जैसे जान दे दी हो. मैं पूरी ताकत से रोजी को चोदने में लग गया. कुछ ही मिनट बाद हम दोनों चरम पर आ गए थे. मैंने उसकी चूत में ही अपना रस छोड़ दिया. मैंने उसकी फटी हुई कुंवारी चुत जिसमे से खून निकल रहा था को अपने वीर्य से भर कर चिकनी कर दिया था l. और उसके ऊपर ही गिर गया वो भी एकदम से झड़ कर मुझसे लिपट गई थी.
मैं झड़ने के बाद भी उसे किस करता रहा. करीब 30 मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों ही साथ में झड़ चुके थे. दो-तीन झटकों बाद मैंने लंड निकाल लिया. कुछ देर बाद जब हम लोग उठे और चादर को देखा, तो उस पर खून लगा हुआ था. वो मुस्कुराने लगी और मुझसे चिपक गई.
चूँकि रोजी की ऐसी जबरदस्त चुदाई के बाद जैसे मेरा सारा दम ही निकल गया हो और मैं रोजी पर हांफते हुए तेज तेज सांस लेते हुए निढाल हो कर गिर गया l भयंकर उत्तेजना के साथ चमकते हुए, मेरी आँखें रोजी को ही निहार रही थी वह भी तेज तेज साँसे ले रही थे और उसके साथ ही उसके स्तन और निप्पल ऊपर नीचे हो रहे थे जिन्हे देख कर मेरे लंड की कठोरता जो झड़ने के बाद अवधारणात्मक रूप से हटा दी गई थी, फिर से प्रबलता के साथ वापस आ गई, मैंने उसकी योनी के गहरे और संकीर्ण मार्ग में अपना जो लंड घुसा कर रास्ता बनाया था उसे मेरे वीर्य ने चिकना कर दिया था . और मैंने फिर से उसके लिए रास्ता बनाना शुरू कर दिया।
इस चिकनाई मेरा प्रवेश द्वार में दुबारा घुसना कुछ और आसान हो गया। अब मैंने अपने झटको को एक नयी उत्सकता, जोश और ताकत के साथ दुबारा शुरू कर दिया और मैंने खुद को हर कदम पर अपनी ताकत दुबारा मिलती हुई महसूस किया, और योनी में चलने वाले धक्के के साथ मैंने अपने आप को उसके ऊपर टिका दिया तब तक जबरदस्त धक्के लगता रहा जब तक मैंने अपना लंड पूरा का पूरा उसकी चूत में जड़ तक पैबस्त नहीं कर दिया .
इस आखिरी झटके का दर्द इतना ज्यादा था कि रोजी एक तेज तीखी चीख को दबा नहीं पायी और दर्द भरे आनंद के साथ झड़ गयी , लेकिन मैंने उसपे कोई ध्यान नहीं दिया; यह मेरी जीत का अंतिम नोट था, और केवल हमारे आनंद के स्वादिष्ट आकर्षण में जुड़ गया था क्योंकि मैंने अपने लंड को उसकी प्यार की म्यान के नरम, सुस्वाद परतों के भीतर में पूरा दफन कर सारा लावा वही उगल दिया था और हम एक दूसरे के साथ निकटतम संयोजन में थोड़े समय के लिए ऐसे लेटते हैं, जैसे हम दोनों परस्पर जुड़े हुए हो ।
उसके गले में अपनी बाजू डाल कर उसे अपने आलिंगन में लेकर उसके गुलाबी होठों और चेहरे, पर अगणित चुंबन किये वह मुझ से शर्माते हुए मेरे चुम्बनों का चुम्बनों से जवाब दे रही थी उसके गाल जो दर्द के आंसू जो उसकी सुंदर आँखों से निकले थे उनसे भीगे हुए थे . हालाँकि उसने सब दर्द जो मैंने उसे दिया था बहादुरी के साथ सहा था फिर भी वह उन आंसुओ को रोक नहीं पायी थी l.
कुछ देर बाद मेरी इच्छाओ ने फिर जोर मारा और मेरा लंड फिर कठोर हो गया था मैंने लंडमुंड को धीरे से बाहर निकाल दिया और धीरे-धीरे इसे फिर से उसकी चूत के छेद पर रख कर जोर से दबाया; असीम प्यार की एक मुस्कुराहट उसके प्यारे चेहरे पर आ गयी पिछले दर्द के सभी संकेत गायब हो गए, और मैं उसकी फूली हुई योनी की कोमल और रसदार सिलवटों को महसूस कर सकता था, जो मेरे कठोर लंड को जोर से जकड़ रही थी
मेरे झटको की गति एक पल में तेज हो गई, और ये सब इतना रोमांचक था- चूत के अंदर आगे और- पीछे जाते हुए घर्षण करते हुए लम्बा कठोर लंड , उसके पिछवाड़े से टकराते हुए मेरे लिंग द्वारा सहायता प्राप्त, शानदार अंडकोषों की खनखनाहट और फच फच के आवाज माहौल को मादक बना रही थी उसके सभी दर्द के बावजूद, रोजी ने परमानंद में मुझे अपने बाहो में जकड़ लिया था और कह रही थी और जोर से मेरे जानू और जोर से l
और मेरी पीठ को उसने अपने खूबसूरत लम्बी टांगो से कस लिया और मेरे नितम्बो को अपने पैरो से अपनी और दबा कर हमारे प्यार को अपनी पहली आहुति अर्पित की जिसे मेरी प्यार की छड़ी की हलचल से प्रेरणा मिली,थी . फिर मैंने उसके प्रेमरस में अपने रस की एक और धारा को बख्श दिया। उसका प्यार का फव्वारा, भी फूटा . हमारा एक साथ झड़ना उस आग को आंशिक रूप से ठंडा करने का एक प्रयास था जो हमारे भीतर भभक रही थीं। लेकिन हमारा उस आग को शांत करने का हर एक प्रयास उलटे आग में घी डालने का काम कर रहा था और हमारी कामाग्नि और भड़क रही थी I.
इतना नया, बेहद स्वादिष्ट, इतना अनोखा, स्वर्ग का अनुभव करवाने वाला , इसलिए स्वर्गीय संवेदनाएं थीं, वे खुशियाँ जो हम दोनों को महसूस हुईं इतनी परमानंद थीं कि हम एक दूसरे की बाहों में सांपों की तरह कराहते हुए लिपट गए ,
फिर रोजी बोली -
"हे भगवान! मैं मर जाऊं! ओह स्वर्ग! क्या आनंद, क्या आनंद। ओह! ओह! आह! आह! -अह!"
मजा आ गया सच में बहुत मजा आ रहा है
एक लंबी गहरी खींची हुई आह के साथ रोजी ने अपनी बात समाप्त की । हमारे आलिंगन और चुम्बन के कारण झटके मारते हुए उसका पूरा शरीर कांपने लगा और एक बार फिर वह झड़ गयी , उसने अपनी पकड़ के ढीला कर दिया, और एक कंपकंपी के साथ खुद को ढीला छोड़ दिया और बेहोश हो गयी और मैं, जो की बुरी तरह से हांफ रहा था उसके साथ चिपक कर उसकी बाहो में खो गया।
कुछ देर बाद जब हम नींद से जागे तो मैंने उठकर कुछ शराब गिलास में उंडेल कर रोजी को दे दिया, और एक भरपूर जाम अपने अंदर उड़ेल दिया , मैंने उसके योनी, जो मेरे वीर्य रोजी के प्रेमरस और योनि से निकले खून में भीगी हुई थी पर एक नरम चुम्बन, किया " और उसे लेकर टॉयलेट में गया और उसकी चूत और उसने मेरे लन्ड की धोया l और उसकी चूत पर क्रीम लगाई lउसके छूने से मेरा लंड फिर कठोर हो गया और रोजी ने भी मेरा लंड नहीं छोड़ा और लंड पकड़ कर ही मुझे कमरे में ले आयी और मुझे बिस्तर पर धक्का दे कर लिटा दिया
तो मैंने उसकी चूत को सहलाया और पुछा अब कैसी हो दर्द तो नहीं हो रहा तो वह बोली तुमने जो दर्द दिया है उसमे तुम्हारा प्यार छुपा हुआ है और उसे इस दर्द से प्यार हैl मैंने उसे प्यार से सहलाते हुए कहा मैं तुम्हे बहुत प्यार करता हूँ तुमने मुझे वह सुख दिया है जिससे मैं आज तक महरूम रहा हूँ तो वह भी बोली आप भी मेरे प्रियतम मुझे बहुत प्यारे हो l हालाँकि आपने मुझे बहुत बेदर्दी से चोदा पर उसमे भी आपका मेरे लिए प्यार ही छुपा था मैं अब बस सिर्फ आपकी ही बन कर रहना चाहती हूँ l क्या आप मुझे हमेशा ऐसे ही प्यार करेंगे . तो मैंने कहा रोजी . .
" तुम मेरे प्यार का सच्चा फव्वारा हो , तुम मेरी प्रिय, स्वादिष्ट कभी न ख़त्म होने वाले सुख और आनद की एकमात्र कुंजी हो इस क्षण से मेरा पूरा जीवन और आत्मा हमेशा आपके लिए समर्पित है।"
तो रोजी मुझ से लिपट गयी और मुझे मेरे सारे बदन पर बेतहाशा चूमने लगी और फिर उसके ओंठ मेरे ओंठो से जुड़ गए रोजी मेरे ऊपर आ गई थीं. मेरे खड़े लंड पर धीरे धीरे अपनी चूत दबाकर लंड को अन्दर घुसा रही थीं. मुझे उस समय मुझे बेहद मज़ा आ रहा था. वो मेरे लंड पर धीरे से उठतीं और फिर नीचे बैठ जातीं, जिसकी वजह से लंड अन्दर बाहर हो रहा था. वो खुद अपनी चुदाई मेरे लंड से कर रही थीं और बहुत मज़े कर रही थीं. सच कहो तो रोजी को मेरे लंड पर उछलते हुए मुझे बहुत सेक्सी लग रही थीं. . मैं अपने चूतड़ उठा कर उसका साथ दिया. जब मेरा लंड उसकी चूत के अन्दर पूरा समा जाता था, तो हम दोनों की आह निकल जाती थी. फिर मेरे हाथ उसके हिलते हुए मम्मों को मसलने लग गए
उसके बाद रोजी मेरे ऊपर झुक गयी और हम लिप किस करते हुए लय से चोदने में लग गए. मैं उसको चूमने लगा और चूमते चूमते हमारे मुँह खुले गए और मैं उसकी झीभ चूसने लग गया
फिर हम दोनों झड़ गए इसी तरह बार बार चोदते हुए "मैंने रोज़ी के साथ पूरी रात बिताई, अपने कुंवारेपन के आकर्षण का पूरा आनंद उठाते हुए हम दोनों ने अपने कुंवारेपन के भंग होने का जश्न पूरी रात एक साथ पूरे मजे लेते हुए बार बार लगातार हम चुदाई करते रहे कभी मैंने उसे चोदा कभी उसने मुझेअपनी और खींच कर अलग अलग आसान में चुदाई की और मानो अपनी कामाग्नि को शांत करना चाहते हो पर हर बार हमारी कोशिश नाकाम ही हुई और उसके बाद बहुत जल्द ही हम दोनों एक दुसरे को चूमते चाटते दुबारा शुरू हो जाते थे थोड़ा सा आराम करते , फिर से गले लगाते हुए, एक खुशी के समुद्र में तैरते हुए एक दुसरे में खोये रहे । पता ही नहीं चला इस तरह प्यार करते करते कब सुबह हो गयी
सुबह जब उजाला हुआ तो रोजी बिस्तर पर बैठी थी , लगातार बार बार चुदाई के कारण दोनों बुरी तरह से थक चुके थे पर शायद एक दुसरे के लिए आकर्षण और लगाव काम होने की जगह बढ़ गया था मुझे लग रहा था मैं रोजी के बिना अब नहीं रह पाऊँगा और चाहता था रोजी हमेशा मेरे पास रहे और मैं उसे जब चाहू प्यार कर सकू l रोजी की आँखों में भी मुझे वही प्यार नजर आया और मैंने रोजी को अपनी और खींचा तो वह मेरी बाहो में समा गयी और अपना चेहरा मेरी छाती में छिपा दिया।
उसने शुरू किया, "पिछली रात बहुत खास थी। मैंने कभी भी किसी से इतना जुड़ाव महसूस नहीं किया है, और अपनी पहली चढ़ाई की रात से ही किसी व्यक्ति के बारे में इतना मजबूत महसूस किया है। " मैंने कुछ कहना शुरू किया, लेकिन रोजी ने उसे रोकने के लिए अपना हाथ रखा।
"यह कल रात एकदम सही था, कम से कम मेरे लिए। आपने मुझसे ऐसा प्यार किया और मुझे लगा कि हम दो बदन एक जान हैं उसकी आँखों से अब आँसू बहने लगे थे, , कल रात, जब तुम मेरे पास आए, तो तुमने मेरे भीतर कुछ गहरा जागृत किया। मुझे ऐसा लगा कि मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं तो मैंने कहा मेरा भी यही हाल है l अब मैं भी तुमसे दूर नहीं रहना चाहता l और ये कहते हुए रोजी के ओंठो पर किश किया तो उसने भी वापिस किश किया l
उसके छूते ही लंड महाराज फिर जोश में आने लगे l उसे धीरे से उसे उठाते लिप किश करते हुए हुए, मैंने उउसके स्तनों को दबाना शुरू कर दिया, जबकि उसके हाथ का स्पर्श मुझमें नए सिरे से आग लगा रहा था फिर रोजी ने अपने हाथ में मेरा लिंग ले कर उसे सहलाया तो मेरी आह निकल गयी तो मैंने कहा अभी भी मैं और ये तुम्हे और प्यार करना चाहता है पर मैं बहुत थकान महसूस कर रहा हूँ l ,उसके छूने भर से मेरा लंड अपने विकराल आकार में आ गया
रोजी बोली अब मुझ में भी और चुदाई की हिम्मत तो नहीं है मैं भी बुरी तरह से थक चुकी हूँ और मेरी चूत भी एक दम से सूज गयी है और बहुत दुःख रही है पर मन अभी नहीं भरा है और ऐसा ही हाल मेरे लंड का था । लेकिन फिर भी मैं उसे एक बार और चोदना चाहता था और जब मैंने उसे अंतिम बार एक बार मुझे चोदने के लिए सहमत किया, मैंने सुझाव दिया कि हमें "अपने आप को एक संभोग के लिए सोचने की कोशिश करनी चाहिए," और बार बार लंड को चूत में अन्दर-बाहर करना, जैसे वो आम तौर पर संभोग के दौरान किया जाता है मुश्किल लग रहा था ।
तो मैंने कहा ऐसा करते हैं एक बार लंड अंदर घुसा लेने दो ये अब तुम्हारी चूत से दूर नहीं रहना चाहता हैं इसके बाद मैंने अपने कठोर हो चुके लिंग को उसकी चूत के छेद पर रखा और एक झटके पे पूरा का पूरा अंदर उतार कर योनि के अंदर गहराई से दफन कर दिया । और फिर, हम दोनों के शरीर एक दुसरे से लिपट गए और हमारी आँखें बंद थी , फिर मैंने रोजी से कहा जो हम दोनों ने कल रात किया उसे एक बार फिर सब मानसिक तौर पर महसूस करते हुए मन ही मन दोहराओ फिर मैंने अपने दिमाग (अपनी खुद की यौन कल्पनाओं) का उपयोग करते हुए सब ममानसिक तौर पर महसूस किया धीरे-धीरे मेरी मानसिक यौन उत्तेजना के उस बिंदु तक बढ़ गया जहां मैं संभोग का कारण बन गया मेरे मस्तिष्क की यही तरंगे रोजी ने भी महसूस करि और हम दोनों बिना अपने जननांग को धक्को द्वारा हिलाये सम्भोग करने लगे l
वास्तव में, जब रोजी मेरे साथ इस तरह से सम्भोग कर रही थी तो मैं रोजी के साथ अपनी पहली चुदाई के पूरे घटना क्रम को मानसिक तौर पर दोहरा रहा था और इससे अपनी मानसिक यौन उत्तेजना को इतने उच्च स्तर पर रखने में कामयाब रहा, रोजी से भी मैंने ऐसा ही करने को कहा कि रोजी को मैंने दो बार झड़ते हुए महसूस किया ।
हालाँकि मुझे शुरू में अपनी यौन उत्तेजना का निर्माण करने में थोड़ा समय लगा, लेकिन यह पता चला कि मैं वास्तव में "संभोग करने के लिए खुद को" सोच सकता था। और मैं ये सब कुछ देख सोच कर बहुत हैरान था
(अब हर चीज पर पीछे मुड़कर, मैं वास्तव में नहीं जानता कि मैं इस तथ्य से इतना हैरान क्यों था कि मेरे पास एक संभोग करने के लिए "खुद को सोचने" की क्षमता थी, क्योंकि मुझे पता था कि सेक्स शोधकर्ताओं ने हमेशा दावा किया था कि सेक्स वास्तव में 90% मानसिक और केवल 10% शारीरिक है।)
और आखिरकार उस दिन मैंने उस सुबह रोजी की चूत में अपना लावा जमा कर दिया, वो भी,एक बार भी, अपने लिंग को उसकी योनि में अंदर-बाहर किये बिना । अद्भुत यह मेरे और रोजी के सबसे लम्बे चलने वाले और कामुक यौन अनुभवों में से एक है।
वैसे, इस तरह से मानसिक सेक्स का मतलब का मतलब यह नहीं है पुरुष जानबूझकर योनि के अंदर घुसे हुए (गर्भाशय ग्रीवा के खिलाफ) अपने अन्यथा-स्थिर लिंग के सिर का विस्तार और अनुबंध नहीं कर सकता जो की आगे लगभग हर बार मानसिक सेक्स करते हुए मैंने रोजी के साथ अक्सर किया - इसी तरह रोजी भी मेरी हरकतों को महसूस करते हुए अक्सर मानसिक सेक्स के दौरान योनि के अंदर घुसे हुए कठोर लिंग को निचोड़ने और मालिश करने के लिए अपनी योनि में मांसपेशियों का उपयोग करती है यहां महत्वपूर्ण यही है की मानसिक सेक्स के दौरान हम जान बूझकर पैल्विक रॉकिंग या जननांग थ्रस्टिंग नहीं करते स्वाभिक तौर पर कुछ हो जाए तो उसे रोकते भी नहीं है ।
उसके बाद अपना लिंग रोजी की योनि के अंदर दाल कर ही हम दोनों गहरी नींद में खो गए उसके बाद हमारी नींद तभी खुली जब बॉब ने हमारे दरवाजे पर दस्तक दी तो हम मुश्किल से अपने आप को ठीक कर पाए। मैंने दरवाजे को तुरंत खोल दिया, और बॉब और रूबी अंदर आ गए। तो रूबी ने रोजी को बधाई दी और बॉब ने मुझे बधाई दी मैंने भी बॉब और रूबी का बहुक्रिया अदा किया के उनके कारण ही मुझे रोजी का साथ मिल पाया है और मैं प्रेम की दिव्य कला के रहस्यों को जान पाया था
फिर मैंने जब तक गाँव में रहे तब तक अपनी सारी रातें रोजी के साथ बिताईं, कभी-कभी उसके कमरे में में, फिर से मेरे अपने कमरे में कभी जब रात के इंतजार नहीं हो पाता था तो मैं उसे दिन में अपने कमरे में ले जाता, ये घर के किसी भी कोने में जहाँ हमे कोई नहीं देख रहा होता था और उसके साथ खूब आनंद लेता और रोजी भी हमेशा खुल कर मेरा साथ देती थी ।
एक दिन, जब रोजी मेरे साथ मेरे कमरे में, बिस्तर पर लेती हुई थी , उसके कपड़े ऊपर उठे हुए थे मेरा कठोर लंड उसकी चूत के अंदर बाहर हो रहा था अचानक रूबी ने कमरे में प्रवेश किया, क्योंकि मैंने जल्दबाजी में दरवाजा अंदर से बंद नहीं किया था
रूबी को मेरे खड़े लंड का एक अच्छा दृश्य मिला, और वह इसे देख रहा थी , जाहिर तौर पर मेरे लंड के इसके इतने बड़े होने पर आश्चर्यचकित थी लेकिन हम जिस हालात में थे उसे देख कर चुपचाप दरवाजा बंद कर चली गयी
आगे क्या हुआ ये कहानी जारी रहेगी
आपका दीपक
दोस्तों मैं दीपक अठारह साल की उम्र तक मैं पढाई में ही डूबा रहा l मैं एक मेधावी छात्र था और पढ़ने लिखने में होशियार था मेरे कोई ख़ास दोस्त भी नहीं थे और स्कूल में भी अपने अध्यापको के ही साथ अपनी पढाई में ही अधिकतर ध्यान और समय लगता था l स्कूल ख़त्म करने के बाद और फाइनल पेपर देने के बाद में अपने अपने स्वाभाविक रूप से अकर्मण्य स्वभाव के कारण, मैं अपने जीवन की नीरस दिनचर्या से इस हद तक विचलित हो गया कि मुझे यकीन हो गया कि मैं तीन महीने से अधिक समय तक जीवित नहीं रह सकता , l
मुझे बदलाव की बहुत सख्त जरूरत महसूस हो रही थी l
जब मेरे सब पेपर ख़त्म हो गए तो मैंने मैंने अपनी सभी किताबो को एक कोने में फेंक दिया, l फटाफट मेरा कमरा जो की पहली मंजिल पर था उससे नीचे उतरा और घर से बाहर जाने के लिए निकला , और दरवाजे पर अपने पिता से मिला; l
उनके साथ मेरे फूफा रोज़र और उनके दो बेटे थे, जो मेरी ही उम्र के थे। मुझे लगा अब इनके साथ मैं अपनि दिनचर्या को बदल कर अपनी बोरियत दूर कर सकूंगा और खूब खेलूंगा और मस्ती करूंगा l
दिन के दौरान मेरे पिता ने मुझे बताया कि वह और मेरी माँ वह कुछ दिन के लिए काम के सिलसिले में विदेश ( इंग्लैंड) जा रहे हैं जहाँ पर मेरे फूफा भी रहते हैंl और उनकी अनुपस्थिति में मुझे अपने फूफा के साथ रहना था।, और यह कि एक या दो सप्ताह के लिए हमारे पास रहने के बाद मेरे फूफा और और फूफेरे भाई गाँव में जाएंगे l
अगले दिन मेरे पिता ने मुझे कुछ अच्छी सलाह दी और किन किन चीज़ो का ख्याल रखना है l उनके पीछे से क्या करना है l क्या नहीं करना है कैसे करना है l पारवारिक परंपरायए सब समझाया गया और इस हिदायत के बाद की अपने फूफा की सब बात मानना और मुझे आशीर्वाद देने के बाद, लंदन की और रवाना हो गए ।
मेरे फूफेरे भाई, रोबोट ( बॉब) और टॉम जिनसे मेरी अच्छी बनती थी l रोबोट ( बॉब) और टॉम दोनों अँगरेज़ थे क्यंकि मेरे फूफा भी अँगरेज़ थे lऔर लगभग हर साल कुछ दिन के लिए हमारे पास रहने लंदन से आते थे , और मुझे उनके साथ खूब मजा आता था l पहले जब भी मिलते थे तो दोनों बहुत सीधे और सरल लड़के थे लेकिन इस बार दोनों बहुत शैतान या यु कहिये बदमाश हो गए थे l
, मुझे वो दोनों अब दो जंगली घोड़ो से लगते थे, जो कभी भी किसी देश के गाँव के सीधे सादे निवासियों पर खुले छोड़ दिए गए हो , हर शैतानी करने के बाद पकडे जाने पर मुझ पर डाल देते थे और खुद साफ़ बच निकलते थे l दोनों सभी प्रकार के कुचक्रों बनाने में बहुत निपुण और विद्वान साबित होते थे, ।
हमारे फूफा जिन्हे कुछ व्यावसायिक और अन्य व्यस्तता के कारण हमारे आचरण की देखभाल निगरानी करने का समय नहीं था इसलिए बॉब और टॉम को एक तरह से पूरी छुट मिली हुई थी । वह दोनों दिन भर उछल कूद मचाते रहते थे . जिसे देख कर मैं भी मजे लेता रहता था . और कभी कभी उनके साथ धमा चौकड़ी मचा लेता था l
फिर दो दिन बाद फूफा हमें लेकर गाँव में हमारी पुरानी पुश्तैनी महल नुमा घर में ले गए l वहाँ पर भी बॉब और टॉम की उछल कूद जारी रही क्योंकि फूफा जमीन जायदाद के सारे मसले देखने में ही व्यस्त रहते थे l और कोई नौकर चाकर डर के मारे बॉब और टॉम की शिकायत नहीं करता था क्योंकि मैं भी उनमे जाने अनजाने शामिल रहता था ll lवैसे हम सब के अलग अलग बड़े बड़े आलिशान कमरे थे फूफा किसी काम से पास के गाँव में अपने किसी मित्र से मिलने चले गए और हमे पता चला वह आज रात वापिस नहीं आएंगे l
शाम को मैं बॉब की तलाश में मेरे फुफेरे भाई बॉब के कमरे में गया, दरवाजा खोलने पर, मैंने जो कुछ देखा, मैं उस पर पूरी तरह से चकित था। वहाँ बिस्तर पर टॉम लगभग नंगा एक बेहद खूबसूरत भगवान् की बनाई हुई लाजवाब मूर्त के जैसी गोरी गुलाबी गालो वाली कमसिन लड़की की बाहों में खोया हुआ था l जिसके कपडे हमारी नौकरानियों जैसे थे l
जब मैंने कमरे में प्रवेश किया तो वहां बॉब उस खूबसूरत कन्या के ऊपर एक तंग अंतरंग आलिंगन में जकड़ा हुआ लेटा हुआ था l लम्बी खूबसूरत सफेद टांगों का एक जोड़ा उसकी पीठ के ऊपर से पार हो गया था, और उनके शरीर की थिरकन, हिलने और स्पीड को देखकर मुझे लगा कि वे दोनों असीम आनंद ले रहे हैं जो एक तरह से पूरी तरह से संतोषजनक था और दोनों उस आनद दायक क्रिया में जिसमे वह पूरी तरह से डूबे हुए थे कि उन्हे मेरे आने का कुछ पता नहीं चला की कब मैंने कमरे में प्रवेश किया है।
हालांकि, तीन दिनों के दौरान जब मेरे फूफेरे भाई मेरे साथ थे, उन्होंने भद्दे भद्दे चुटकुले और असभ्य बातचीत करके, लड़किये के पवित्र होने की जिस सख्ती के साथ मेरी माँ ने मुझे पाला गया था उन सभी मेरी पूर्व धारणाओं को उखाड़ फेंका था, मुझे कभी भी लड़कियों की संगत करने की अनुमति नहीं थीl
मैं अपने माँ बाप की एकलौती औलाद हूँ l यहाँ तक के मेरी देखभाल करने वाले भी पुरुष नौकर ही थे l हालाँकि मेरे पिताजी की एक से अधिक पत्निया रही है जिनसे मेरी कुछ सौतेली बहने हैं पर मुझे हमेशा उनसे और मेरी सौतेली माओ से दूर ही रखा गया था l. शायद सौतेलेपन के वजह से माँ के मन में कुछ डर या पूर्वाग्रह थे l बॉब और टॉम की भी बहने जब हमारे घर आती थी मुझे उनसे दूर ही रखा जाता था l यहाँ तक की मेरी किसी महिला से कोई ख़ास बातचीत भी नहीं होती थी और मेरा स्कूल भी सिर्फ लड़को का ही था जिसमे कोई महिला टीचर भी नहीं थी l
बिस्तर पर दोनों को इस तरह से देखकर मैं इतना चकित हो गया कि मैं दरवाजे पर खड़ा उन्हें तब तक देखता रहा जब तक कि बॉब ने हिलना बंद नहीं कर दिया उसके बाद वह कुछ देर शांत होकर उस खूबसूरत लड़की के ऊपर ही लेट गया और उसे चूमने लगा फिर उसे ने खुद को लड़की से दूर कर लिया । वह उठा , उसकी पीठ मेरी और थी जबकि वह सुन्दर खूबसूरत अधनंगी लड़की अभी भी अपनी आँखें बंद करके लेटी हुई थी , उसका पेटीकोट और कमीज ऊपर की और था जिससे उसके बड़े बड़े सुडोल स्तन मुझे ललचा रहे थे लड़की का बदन इतना सुन्दर खूबसूरत आकर्षक उत्तेजक होता है ये मुझे उस दिन ही पता चला था
उस लड़की की टाँगे खुली हुई थी वह हिली और उसने अपनी जांघों को अलग किया l मेरी आँखे उसके सुन्दर गोर सुडौल बदन को टकटकी लगा कर देखने लगी और उसके गोल सफेद स्पॉट पेट का मुआयना किया , जिसके नीचे के हिस्से और दोनों जांघो के बीच की जगह को गहरे काले घुंघराले बालों की एक बड़ी वृद्धि,ने कवर किया हुआ था ,
मैंने ऐसा अक्सर लड़को से सुना था, लेकिन पहले कभी नहीं देखा - एक योनी; जो घुंघराले बालों के ताले के बीच छुपी हुई थी , उसकी जांघो के खुलने से मैंने उस छुपी हुई प्रिय स्वादिष्ट गुफा जो की एक गर्म भत्ते की तरह थी उसके बीच के चीरे के आसपास मैं दो मोटे और रसीले होंठों को थोड़ा सी खुली हुई थी की पहली झलक देखि , जिसमें से थोड़ा सा सफेद दिखने वाला झाग निकल रहा था।
मैंने जो कुछ देखा उससे मेरी संवेदनाएँ भ्रमित थीं, और अजीब सी भावनाएँ, जो मुझ में जग गई थीं,
मैं उस खूबसूरत नज़ारे को और पास से देखने के लिए बिस्तर की ओर आगे बढ़ा। जिस क्षण मेरे कदम को सुना गया, उस लड़की ने खुद को बेडकवर के नीचे छुपा लिया, जबकि बॉब भी पलटा और मुझसे मिलने आया, और मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर मुझे बिस्तर तक ले गया, कहा, -
मेरे भाई दीपक तुमने क्या देखा है? आप कितने समय से कमरे में हैं?" मैंने जवाब दिया और उसे बताया कि मैंने उनके पूरे पराक्रम और प्रदर्शन को देखा है। जब तुमने सब देख ही लिया है तो फिर कैसी शर्म कहते हुए बॉब ने उस लड़की को कवर उतार कर फेंक दिया, तो उसने अपने स्तनों को एक हाथ से और एक हाथ से अपने चहरे को छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगी और मैं उस खूबसूरती के मुजस्मे को घूरता ही रहा और मेरा हाथ अनायास ही मेरे लंड पर चला गया जो की मुझे कड़ा होता हुआ महसूस हुआ और बाब ने उसे बैठे हुए मुद्रा में उठाते हुए, एक हाथ उसकी कमर पर लपेटते हुए कहा, -
" दीपक भाई , क्या तुमने कभी किसी लड़की के संग का आनंद लिया है l तो मैंने कहा नहीं कभी नहीं l तो बॉब बोलै तुमसे बाते करते हुए मुझे अंदाजा तो था के तुम बिलकुल अनारी हो इस मामले में ,, तुमने एक सुंदर लड़की की बाहों में लेकर प्यार करने से प्राप्त होने के लिए सुख का स्वाद कभी नहीं लिया हैं, तुम्हे नहीं पता इस आनद के आगे दुनिया के सभी सुख और आनंद फीके हैं
तुम ये भी नहीं जानते कि एक खूबसूरत लड़की की बाहो में खो जाना उसे हासिल कर लेना , उसे प्यार करना और उसका प्यार पाने के प्रलोभन का विरोध कर पाना एक पुरुष के लिए कितना कठिन है और पुरुष अपनी पूरी शक्ति और साधन का उपयोग करके एक खूबसूरत स्त्री को हासिल करने के लिए अपना सब कुछ भी दाव पर लगा देता है l इस शारीरिक भूख को रोक सकने की शक्ति बहुत कम लोगो में होती है l
फिर उस लड़की का हाथ पकड़ कर चूमते हुआ बोला lऐसा कौन है जो इस सुंदर, प्यारी, आकर्षक हुस्न की मालकिन हसीना को इंकार कर सकता है l मैं क्या चीज हूँ l इन्होने मुझे कल रात अपने कक्ष में मुझे आमंत्रित करने के लिए सम्मान दिया गया था, लेकिन मैं इंतजार नहीं कर सका और मैंने आज ही अपने कक्ष में आमंत्रित कर इनके शिष्टाचार का जवाब दिया जो इन्होने सहर्ष स्वीकार कर लिया , और ये सब उसी का नतीजा है । "
बॉब के साथ वह खूबसूरत हसीना मेरी बहन रूबी थी l तो मने रूबी को अपना पास खींच कर उसका मुँह चूम लिया और उसकी कमर में हाथ डाल कर बोला वह खूबसरत हसीना जिसे मैंने पहले बार बेपर्दा देखा था वह रूबी थी .।
. बॉब ने मुझसे पुछा क्यों भाई ये बहुत आकर्षक और खूबसूरत है न तो मैंने उत्तर दिया, "हाँ, वह बेशक ये बहुत ही सुन्दर और आकर्षक है," और लिंगों के संयोजन से प्राप्त सुखों को एक अंतर्दृष्टि प्राप्त करने की इच्छा महसूस करते हुए, मैंने अपने हाथ रूबी के नंगे घुटने पर रखे, जो अभी भी बिस्तर के किनारे पर बैठी थी बिस्तर, उसके कपड़े उसकी योनी और जाँघों को देखने की असफल कोशिश कर रहे थे, और उसने अपने क़मीज़ के नीचे खिसका दिया था, जिससे वह उन छाये हुए बालों के पहाड़ पर आराम कर रही थी , जो अपने नीचे उस स्वादिष्ट योनि की छुपाये हुई थी । मेरे हाथ धीरे धीरे उसकी रस भरी योनि की और बढ़ने लगा और धीरे धीरे रूबी को अपनी और खींचने लगा l
वही पता नहीं मुझे क्या हुआ के अनायास ही मेरे हाथ रूबी के घुटनो पर चले गए और उसकी योनि की और बढ़ने लगे लेकिन बॉब ने मुझे रोकते हुए कहा, "मुझे माफ कर दो, मेरे भाई , लेकिन रूबी फिलहाल मेरी है , कम से कम वर्तमान के लिए, लेकिन जैसा कि मैं देख रहा हूं कि आप प्रेम की देवी के रहस्यों में खुद को डूबा देने के लिए उत्सुक हैं त्यार हैं , मुझे लगता है कि रूबी की मदद से मैं आपको रात के लिए एक साथी खोजने में सक्षम हो सकता हूं, उसने रूबी की तरफ देखते हुए कहा क्या हम मेरे भाई के लिए एक साथी नहीं ढूंढ सकते? "।
तो रूबी वहां एकदम से कूद कर आपमें पैरो पर खड़ी हो गयी और मुस्कुराते हुए बोली , बहुत बढ़िया "हम महाशय दीपक को मेरी छोटी बहन रोजी से मिलवा देते हैं और मुझे यकीन है कि मेरे खुद की तुलना में रोजी बहुत सुंदर लड़की है, कुमार दीपक रोजी आपको बहुत अच्छी लगेगी lउसकी मुझ से बड़ी सुडोल और गोरो गोरी स्तन हैं, "उसने फुसफुसाते हुए मेरे कजिन बॉब के कानो में कुछ कहा l तो बॉब ने मुझे बधाई देते हुए कहा मेरे भाई तुम बहुत किस्मत वाले हो तुम्हे बहुत बहुत बधाई अभी मुझे रूबी ने बताया है . तुम्हारी पहली साथी भी तुम्हारी तरह ही कुंवारी है तो मुझे रूबी ने भी मुबारक दी और अपनी गोल सफेद ग्लोब गोलाइयों की जोड़ी को कवर किया कहा, मैं अपनी आँखों से लालच से खा रहा था। , "मुझे यकीन है ,जब हम उसे आज रात लाएंगे तो आप रोजी से मिल कर प्रसन्न होंगे, ।"
तो मुझसे बॉब ने पुछा तुम चुदाई के बारे में क्या जानते हो l तो मेरा जवाब सुन कर वह बोलै तुम्हे बहुत कुछ सीखाना पड़ेगा और बोलै रूबी मेरी मदद करो दीपक को कुछ सेक्स सीखा देते हैं
बॉब बोलै तो दीपक तुम अब ठीक से चुदाई देख और सीख लो.
बॉब रूबी को चूमने लगा. फिर बॉब उसे किस करने लगा और उसके और अपने सारे कपडे उतार डाले बॉब उसके बूब्स दबाने लगा और रूबी उसके खड़े लण्ड को सहलाते हुए अपनी चूत पर घिसने लग गयी.
और फिर बॉब अपना लण्ड रूबी की चुत में घुसा कर दनादन धक्के लगाने लग गया फिर एक दो आसान बदले और कुछ देर बाद झड़ गया. l रूबी ने मुझसे वादा किया कि वह रात को अपनी बहन को मेरे कमरे में ले आएगी तो मैंने भी वादा किया की मैं भी उसका और बॉब का राज गुप्त रखूँगा और जो मैंने देखा था उसका किसी से भी कोई जिक्र नहीं करूंगा, और उन्हें वही छोड़ कर अपने कमरे की और जाने लगा
बॉब रूबी के कान में कुछ फुसफुसाया और उसके बाद अपने कपडे उठा कर रूबी भाग गयी और जाते हुए बोली रात के खाने के बाद मैं रोजी को ले कर आती हूँ l उसके बाद बॉब ने मुझे सेक्स के बारे में कुछ और टिप्स दी और सफाई करने की जरूरी हिदायते दी और उसके बाद मैं अपने कमरे में आ गया और नहा धो कर सफाई कर के जल्दी जल्दी रात का खाना खाया
रात को जल्दी से अपने कमरे में जाकर मैंने एक घंटा इंतज़ार के बुखार में बिताया तब रूबी मेरे कमरे में आयी , और मुझसे बोली आप कुछ देर के लिए अपने भाई बॉब के कमरे में चले जाओ तब तक मैं आपका कमरा त्यार कर देती हूँ इतनी देर में रोजी भी आ जायेगी फिर जब मैं बुलाऊंगी आप आ जाना
लगभग आधे घंटे में रूबी मेरे पास आयी और मुझे मेरे कमरे में ले गयी वहां कमरे का नज़ारा बदला हुआ था l बिस्तर फूलो से सजा हुआ था मेरे अंदर आते ही रूबी की बहन रोजी कमरे में दाखिल हुई मैंने रोजी की तरफ हाथ बढ़ाया रोजी एक सबसे खूबसूरत लड़की थी, रोजी ने एक दुल्हन की गुलाबी पोशाक पहन रखी थी
मैं उसे एकटक देखता रहा और जिस पल वह कमरे में दाखिल हुई और दरवाजा बंद किया गया, मैं आगे की ओर बढ़ गया , उसे अपनी बाहों में पकड़ लिया, और उसे एक सोफे पर ले गया, जहां मैं बैठ गया और उसे अपनी तरफ खींच लिया रोजी ने एक दुल्हन की पोशाक में अपना चेहरा नक़ाब से ढक रखा था,, मैंने उसका हाथ पकड़ कर चूमा और अपनी जेब से एक अंगूठी निकाल कर उसे तोहफे के तौर पर दी और उसे कहा ये हमारे पहले मिलान की निशानी के तौर पर तोहफा कबूल करो मेरी रोज l उसने अपना हाथ आगे बढ़ा दिया और मैंने उसे अंगूठी पहना दी
मैंने उसका नक़ाब हटाया और उसका खूबसूरत चेहरा देखकर मुझसे रुका न गया और उसके होंठ चूमने लगा मैंने वो रुमाल जो उसके स्तनों को ढक रहा था उसके पिन को खोला तो उसके बड़े गोल सुडोल उरोज मेरे सामने उजागर हो गए मैं उसके स्तन चूमते हुए अपनी बाहों में फिर से उसे कस कर जकड लिया । मेरी निष्ठुरता और कुछ हद तक अपने आप को मेरे आलिंगन से मुक्त करने के लिए रोजी संघर्ष करणे लगी और बोली प्लीज मुझे छोड़ दो l तब उस कमरे में मौजूद रूबी जिसे मैं लगभग भूल ही चूका था वह बोली
कुमार!! रोजी इससे पहले किसी पुरुष के साथ अंतरंग नहीं हुई है और कुंवारी है इसलिए आपको थोड़ी गंवार या अनारी लग सकती है l लेकिन आपके साथ रहने के लिए बहुत इच्छुक उत्साहित है और वो आपको जरूर खुश करेगी ऐसा मेरा यकीन है , मुझे पक्का भरोसा है, वह आपकी सारी इच्छाएं पूरी करेगी ; और आप दोनों बहुत मजे करोगे ये उसका पहली बार है इसलिए थोड़ा आराम से और प्यार से कीजिये क्यों मेरी बहन रोजी क्या ऐसा नहीं है,?
जिस पर रोजी ने एकदम से जवाब दिया, "ओह हां," दीदी lऔर मेरी छाती में अपना चेहरा छिपा लिया। कसम से उसकी इस अदा पे मैं एकदम फ़िदा हो गया और उसका चेहरा ऊपर कर उसके माथे पर एक किस किया और उसे अपनी छाती से लगा लिया और बोलै मेरी जान घबराओ मत अब आराम से करूंगा . क्या करूँ तुम्हे देख कर मुझ से रुका ही नहीं जा रहा .
रूबी ने मुझे बताया कि चूंकि शराब जोश और हिम्मत को को बढाती है प्रेम की उत्तेजना को भी बढाती है, वह बोली वह मेरे लिए कुछ शराब ले कर आती है तो मैंने कहा रूबी तुम चिंता मत करो शराब हर कमरे में उपलब्ध है क्योंकि मेरे पिताजी और फूफा सब शराब के शौकीन है फिर वो रोजी से बोली कुमार को अच्छे से खुश करो मेरी बहन और उन्हें अच्छी शराब जितनी वो पी सके उतनी पिलाओ और उनकी सब बात मानो फिर वह गयी और एक ट्रे में कुछ शराब के बोतल, केक नमकीन कुछ फल मिठाई इत्यादि ले आयी और मेरे पास आ कर दो गिलासों में शराब डाल कर मुझे एक छोटी बोतल देते हुए बोली मेरे कान में फुसफुसाई आप रोजी को शराब में इस ख़ास देसी दवा की कुछ बूंदे डाल कर पीला दे और आपके गिलास में भी मैंने कुछ बूँद डाल दी है इससे आपका आनंद बढ़ जाएगा l फिर मजे करिये और शुभ रात्रि बोल कर वह दरवाजा बंद कर चली गयी
जब रूबी चली गयी तो मैंने अंदर से दरवाजा बंद कर दिया, फिर एक टेबल को बिस्तर का पास खींचा और रोजी को बिस्तर पर ले गया और खुद उसके पास बैठकर, मैंने पहले बिना रोजी के साथ कोई स्वंतंत्रता लिए आगे धीरे धीरे आगे बढ़ने का फैसला किया और अपने सभी प्रयास आराम से करने का प्रयास किया, मैं उसकी प्रशंसा करने लगा मैं उसे कहा तू मुझे बहुत अच्छी लगी तुम बहुत अच्छी हो तो वह पूछती आप को मुझ में क्या अच्छा लगा तो मैंने कहा तुम्हारे रास भरे ओंठ मन करता है बस इन्हे चूसता रहूँ तो वह बोली तो फिर किसने रोका है और मेरे ओंठो पर उसने अपने ओंठ रख दिए l और मैंने उसके रास भरे ओंठो पर चुम्बन कर दिया ऐसे ही उसकी तारीफ करता रहा और उसका पूरा चेहरा गाल नाक माथा आँखे धीरे धीरे सब चूमते चूमते चाट गया
मैंने उसे शराब का गिलास दिया तो वह बोली मैं नहीं पीती तो मैंने उसे एक घूँट पीने को कहा तो उसने पि ली और बोली अब आप पीओ तो मैं पहले शराब का घूँट भरता फिर अपने होंठ उसके ओंठो से लगा कर उसे अपने ओंठो से शराब पिलाने लगा मैंने उसको लगभग आधा दर्जन गिलास शराब पिलाई और उसके साथ खुद भी पि ।
कुछ देर बाद दवा और दारू के असर से वह बहुत स्वतंत्र रूप से नशे में थी, तो उसके चरित्र की स्वाभाविक जीवंतता उसके खुले और मुक्त वार्तालाप में दिखाई देने लगी। मैंने फिर उसे कहा तुम बेहद सुन्दर हो l तो उसने कहा आपको मेरा क्या सबसे सुन्दर लगता है तो मैंने कहा उसका हर अंग बेहद सुन्दर है और मुझे प्रिय है तो वह बोली तो सबसे ज्यादा क्या प्रिय है तो मैंने उसकी कमर और गर्दन के चारों ओर अपनी बाहों को रखा, और उसकी छाती को अपने छाती के पास दबाने लगा , और उसको नरम गुलाबी ओंठो पर गरमा गर्म चुंबन करने लगा फिर एक हाथ उसकी छाती पर फिराते उसके मुलायम बदन को महसूस कर रहा था और उसके गोल गोल बूब्स को सहला दबा रहा था।
तो उसने फिर पुछा कौन सा अंग सबसे सुन्दर लगा तो मैंने कहा वही तो जांच रहा हूँ l तो वह बोली सिर्फ जांचेंगे या देखेंगे भी उसका ये प्रश्न सुनने के बाद मेरे ओंठ उसके ओंठो से जुड़ गए और लगभग 10-१५ मिनट मई उसे किश करता रहा इस बीच मेरे हाथ उसकी दुल्हन के पोशाक के ऊपर से ही उसके पूरे बदन को सहला और दबा रहे थे l लेकिन उसके बड़े बड़े उरोज मुझे ललचा रहे थे तो मैंने पीछे से उसकी ड्रेस की डोरिया खींची और उसके स्तन बहार निकाल कर उन्हें पहले चूमा फिर मसला दबाया और चूस चूस कर दोनों स्तन लाल कर दिए क्या बड़े बड़े गोल सुडोल स्तन थे
इस तरह धीरे धीरे आगे बढ़ता हुआ , उसकी स्तन दबाने के बाद मैं रुक गया और उसके क़मीज़ के नीचे से एक हाथ डाला , उसके कपड़े उसके घुटनों पर चढ़ा दिए। उसकी टांगो और जंघा को सहलाते फिर उन्हें निचोड़ने लगा और उसके पैरों के साथ खेला , मैंने अपना हाथ उसकी जाँघ पर तब तक सरकाया, जब तक कि मेरी उंगलियाँ उसकी कुंवारी चुत के द्वार पर हावी हो गई । उसने पैंटी नहीं पहनी हुई थी उसके मुँह से इस्सस निकली और मेरे ओंठ जोर से चूमने लगीl
रोजी की चूत बिलकुल सफाचट थी l बालो का नाओ निशाँ नहीं था बिलकुल मुलायम चिकनी नरम l जब मैंने हाथ फिराया तो रोजी बोली दीदी ने आज ही साफ करवाई है ख़ास आपके लिए
उसकी रेशमी चूत से खेलते हुए अपनी उंगलियों को घुमाकर चूत के मध्य के लकीर पर फेरते हुए ऊँगली को उनके माध्यम से घुमाते हुए, मैंने अपनी एक उंगली को थोड़ा नीचे लेजाते हुए उसकी गांड के छेद को छेड़ते हुए हलके से गांड में पिरो दिया वह कराह यही आआह आह प्लीज यहाँ नहीं l दीदी कहती है यहाँ बहुत दर्द होता है l, फिर दुबारा उसकी योनि के होंठों के बीच ऊँगली की नोक डालते हुए, उसकी चूत के दाने को ढूंढ लिया मैंने उसे इतनी अच्छी तरह से छेड़ा कि वह अपनी जगह पर उछलने लगी और बोली अब इंतजार नहीं होता प्लीज अब कुछ करो l मैं इसे अब बर्दाश्त नहीं कर सकता। मैं आग पर था; मेरी नसों में से खून उबल रहा था। मेरा लंड फुल टाइट हो गया
मैंने उसे जमीं पर पैरों पर खड़ा किया, और उसके कपडे उतारना शुरू कर दिया, मैंने जल्दबाजी में उसके कपड़े फाड़ दिए, जब तक कि वह मेरे सामने पूरी तरह से नग्न नहीं हो गयी l वाह भगवान् क्या नज़ारा था हुस्न का मेरी आँखे के सामने क्या गोल सुदृढ़ सुडोल स्तन, गोरा मखमली बदन , पतली बलखाती कमर , स्पॉट पेट सुन्दर नैन नक्श , मीठी आवाज , बड़ी बड़ी हिरणी जैसी चंचल आँखे गुलाबी होंठ, हल्के भूरे रंग के लम्बे बाल, नरम चूतड़, और फिगर 36-24-36 का था., तीखी नुकीली नाक , बड़े गोल नितम्ब l लंबी सुगढ़ टाँगे सुन्दर हाथ ,, सब कुछ बेहद सुन्दरl पूरा शरीर सांचे में ढला हुआ बड़े बड़े स्तन इतने गोल और दृढ़। मैं उन्हें दबाने लगा तो कभी चूमने लगा फिर उसके निपल्स को मुँह में ले कर चूसने लगा उसे इस हालात में देख कर मैं सब भूल कर उसे जोर से काटने लगा तो वह ओह्ह्ह आह करने लगी
उसकी ऐसे हालत देख मेरे भी लंड का तनाव इतना ज्यादा हो गया और मुझे लगा मेरा लंड मेरे कपडे फाड़ कर बहार निकल आएगा और फट जायगा तो मैंने अपने सब कपडे ऐसे उतार फेंके जैसे उसमे से कांटे चुभ रहे हो और पूरा नंगा हो होकर उसे पकड़ कर अपने शरीर से चिपका लिया और मेरा लंड उसकी चूत के द्वार पे अपना रास्ता खोजने लगा मैं उसका पूरा बदन महसूस कर रहा था l
हम दोनों कामाग्नि में जल रहे थे l मैंने अपने हाथो से उसे अपने छाती पर दबाता l उसके स्तन कठोर हो मेरी छाती में चुभ रहे थे l उसने भी अपने हाथो से मेरी पीठ को अपने बड़े बड़े स्तनों पर दबा दिया था l तो मैं उसके ओंठो की किश करने लगा और मेरे हाथ उसके उसकी कमर पर फिसलते हुए रोजी के नितंबो की अपनी और दबाने लगे l ऐसा लग रहा था दोनों एक दुसरे में समां जाना चाहते हो
आकर्षित, उससे चिपका हुआ उसके नग्न शरीर को महसूस करते हुए मैं अपने घुटनों पर झुक कर उसके सुस्वाद योनि पर प्यार भरे चुंबन किये । मैं पूर्ण उन्माद में था, और मेरे चूमने से वह भी जल बिना मछली के तरह तड़पने लगी और बोली प्लीज अब रुका नहीं जा रहा कुछ करो मेरे राजा
और उसके शरीर को मेरा करने के लिए, मैंने कांपती हुई लड़की को अपनी बाहों में उठाया, और उसे बिस्तर पर ले गया।
मैंने एक तकिया उसकी शानदार चूतड़ों , गोल गांड को आराम करने के लिए, नितम्बो के नीचे रखकर मैंने उसे नीचे की तरफ बिस्तर पर बिठाते हुए लेटा दिया। मैंने उसकी जाँघों को चौड़ा किया, और लंड पूरा खड़ा था तो उसने एक बार अपना हाथ लंड पर फेरा तो लंड जैसे उसके हाथ के छुअन से पूरा भड़क गया आपका लंड सचमुच काफी बड़ा है l मेरे लंड का साइज 7 इंच है .
और उसकी चूत में जाने को लिए बिलकुल त्यार था , मैंने उसकी चूत पर लैंड की एक बार लगाया उसके चूत के दाने पर लैंड की दो तीन बार रगड़ा तो वह बोली प्लीज अब तडपाओ मत। मुझे बॉब ने बताया था रोजी कुंवारी है आराम से करना थोड़ा दर्द होगा जब वो पूरी तरह तैयार हो उससे पूछ कर ही अंदर घुसना
मैंने लंड चूत पर घिसते हुए उससे पुछा तुम त्यार हो l वह बोली हाँ बस जल्दी करो अब बर्दाश्त नहीं हो रहा l मैंने कहा दर्द होगा तो वह बोली मैं सब सह लूंगी अब तुम अब आ जाओ मुझ में समा जाओ मैं सब सह लूंगी मुझे भी दीदी ने बताया था
मैंने अपनी उँगलियों के आगरा भाग की मदद से साथ, मैंने उसकी टाइट चूत के होठों को बहुत मुश्किल से अलग किया , और अत्यंत परेशानी के साथ अपने कुंवारे लंड के लंडमुंड को उसके कुंवारी योनी के प्रवेश द्वार में डाला।
जैसे ही मैंने महसूस किया की लंड ठीक जगह रखा गया है मैंने थोड़ा जोर लगा कर लंड को चूत पर दबाया और जोर से दबाता हूं, लेकिन रोजी की चूत इतनी टाइट थी के लंड अंदर जाने की जगह वही से नीचे फिसल गया. मैंने लंड को पकड़ा फिर चूत के द्वार पर घिसा और थूक लगा कर गीला कियाl मैंने दो तीन बार ऐसा किया पर अंदर जाने में सफलता नहीं मिली l तो मैंने कहा रोजी लगता ज्यादा ताकत लगानी पड़ेगी तो तुम त्यार हो तो उसने आंखे झपक कर अपनी स्वीरकृति दे दी
फिर से चूत को हाथो से सहलाया चूत के दाने को लंड से मसला फिर उंगलियों की मदद से ओंठो को फिर अलग किया तो रोजी ने भी हाथ से मेरा लंड पकड़कर उसे अपनी चूत के छोटे से छेद पर लगा कर अपने दुसरे हाथ से मेरे नितम्ब दबा कर इशारा किया तो मैंने भी पूरे जोर से एक धक्का दिया इस बार लंड चूत के अंदर जाने में कामयाब हुआ तो आधा लंडमुंड अंदर चला गया और साथ ही साथ रोजी की आह भी निकली l पर उसने लंड को है छोड़ा और आँखे झपक कर मुझे इशारा किया . इस बार मैंने लैंड पर फिर लम्बे समय तक दबाब दिया मेरे भयंकर दबाब देने से लंड को चूत के अंदर का रास्ता मिल गया, और लंडमुंड का सर पूरा अंदर चला गया, मैंने एक बार फिर जोर से धक्का दिया और मेरा लगभग आधा लंड चूत के झिली को चीरता हुआ रोजी का कुंवारापण भंग करता हुआ अंदर चला गया,
उसकी चीख निकली लेकिन न मैंने न रोजी ने उसे रोकने की कोई कोशिश करि l
रोजी की चूत बहुत टाइट थी. मुझे खुद से लगा कि मेरा लंड उस गुफा में फंस सा गया हो, और चूत ने कस कर जकड लिया था मेरी भी चीख निकल गयी थी.
बेचारी रोजी ने अपने कौमार्य भांग में होने वाले दर्द को पूरी हिम्मत के साथ सहा था अपने दांतों के बीच बिस्तर की चादर रखते हुए, हो रहे दर्द के मारे होने वाले रुदन को दबाने के लिए, जबकि उसके हाथ मेरे शरीर को उसके पास ले जाते थे, या यहां तक कि अपने कौमार्य को भंग करने के मेरे जानलेवा इरादों की सहभागी बनते हुए मेरे लंड को भी अपने हाथो से संभाला था और बाकायदा मदद करि थी ।
हम दोनों एक साथ चिल्ला रहे थे 'ऊह्ह्हह्ह मर गएl' मुझे लंड पर गर्म गर्म स्राव महसूस हुआ जैसा की मुझे बॉब ने बताया था ये झिली फटने पर निकलने वाला खून था इसके साथ ही मेरा भी कुंवारापण भंग हो गया लेकिन इस तरह की रोजी की चूत की गुफा में मेरे लंड के लिए रास्ता बन गया था मैंने थोड़ा सा लंड पीछे किया और फिर एक जोर दार शॉट लगा कर पूरा लंड जड़ तक अंदर पैबस्त कर दिया और प्रेम के जलाशय की बाढ़ ने रास्ता दे दिया, और रोजी झड़ गयी और मेरा लंड रोजी के प्रेम के जल से भीग गया ,
उसने चेहरे से ही लग रहा था कि उसे बहुत दर्द हो रहा है. मैंने रोजी को धीरे धीरे चूमना और सहलाना शुरू कर दिया. तो रोजी के आँखों में आंसू आ गए वह बोली आराम से धीरे धीरे नहीं कर सकते थे क्या तो मैंने कहा धीरे करने से अंदर ही नहीं जा रहा था इसलिए ज्यादा जोर लगाना पड़ा l मैंने उससे पुछा बहुत दर्द हो रहा है क्या हाँ हो तो रहा है
मैं बोला- मेरी रोजी मेरी जान ... थोड़ी देर में सब ठीक हो जाएगा. वह बोली प्लीज अब तब तक मत हिलना जब तक मैं इशारा न करून
मैंने उसे लिप किस किया. मैं उसे लिप किस करता रहा. मैंने उसके लिप्स पर काटा, तो उसने मेरे लिप्स को काट कर जवाब दिया. . तो मैंने अपने ओंठ उसके ओंठो से जोड़ कर उसे लिप किश करने लगा और मेरे हाथ उसके बूब्स के साथ खेलने लगे और एक हाथ उसके निप्पल मसलने लगे l फिर मैंने उसकी चूची सहलानी और दबानी शुरू कर दी. वह सिसकारियां ले मजे लेने लगी lवो इस वक्त इस चूमाचाटी में अपना दर्द भूल चुकी थी कुछ देर में रोजी का दर्द कम हो गया
फिर उसने अपने नितम्ब ऊपर उठा कर और मेरे नितम्बो को अपने ऊपर दबाया और पके झपक कर मुझे इशारा किया . तो मैंने धीरे से लंड भहर खींचा और एक बार फिर जोर लगा कर अंदर घुसा दिया .
मुझे महसूस हुआ कि मेरे लिंग को रोजी ने अपनी योनि रस ने भिगो दिया था, जिसकी वजह से लिंग आसानी से अन्दर और बाहर हो पा रहा था.
फिर कुछ देर में ही वो भी मेरा साथ देने लगी. अब उसकी चुदाई में दोनों को जन्नत का मज़ा आ रहा था. कुछ ही देर में रोजी ने भी स्पीड पकड़ ली थी. वो जोश में आ गई थी. और मेरे शॉट के साथ ताल मिलाते हुए अपने नितम्ब हिलाने लगी
अब वो मजे से चिल्लाने लगी थी- अहाआअ ... राआजा ... मर गई ... आईसीई ... और जोर से ... और जोर से चोदो ... बहुत मजा आ रहा है आ जाओ मेरे अंदर समा जाओ l. मेरी चूत को अपने रस से भर दो , ... आआआआ और ज़ोर से ... उउउईईईई माँ ... आहहहांl
उसकी इन आवाजों ने मुझे जैसे जान दे दी हो. मैं पूरी ताकत से रोजी को चोदने में लग गया. कुछ ही मिनट बाद हम दोनों चरम पर आ गए थे. मैंने उसकी चूत में ही अपना रस छोड़ दिया. मैंने उसकी फटी हुई कुंवारी चुत जिसमे से खून निकल रहा था को अपने वीर्य से भर कर चिकनी कर दिया था l. और उसके ऊपर ही गिर गया वो भी एकदम से झड़ कर मुझसे लिपट गई थी.
मैं झड़ने के बाद भी उसे किस करता रहा. करीब 30 मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों ही साथ में झड़ चुके थे. दो-तीन झटकों बाद मैंने लंड निकाल लिया. कुछ देर बाद जब हम लोग उठे और चादर को देखा, तो उस पर खून लगा हुआ था. वो मुस्कुराने लगी और मुझसे चिपक गई.
चूँकि रोजी की ऐसी जबरदस्त चुदाई के बाद जैसे मेरा सारा दम ही निकल गया हो और मैं रोजी पर हांफते हुए तेज तेज सांस लेते हुए निढाल हो कर गिर गया l भयंकर उत्तेजना के साथ चमकते हुए, मेरी आँखें रोजी को ही निहार रही थी वह भी तेज तेज साँसे ले रही थे और उसके साथ ही उसके स्तन और निप्पल ऊपर नीचे हो रहे थे जिन्हे देख कर मेरे लंड की कठोरता जो झड़ने के बाद अवधारणात्मक रूप से हटा दी गई थी, फिर से प्रबलता के साथ वापस आ गई, मैंने उसकी योनी के गहरे और संकीर्ण मार्ग में अपना जो लंड घुसा कर रास्ता बनाया था उसे मेरे वीर्य ने चिकना कर दिया था . और मैंने फिर से उसके लिए रास्ता बनाना शुरू कर दिया।
इस चिकनाई मेरा प्रवेश द्वार में दुबारा घुसना कुछ और आसान हो गया। अब मैंने अपने झटको को एक नयी उत्सकता, जोश और ताकत के साथ दुबारा शुरू कर दिया और मैंने खुद को हर कदम पर अपनी ताकत दुबारा मिलती हुई महसूस किया, और योनी में चलने वाले धक्के के साथ मैंने अपने आप को उसके ऊपर टिका दिया तब तक जबरदस्त धक्के लगता रहा जब तक मैंने अपना लंड पूरा का पूरा उसकी चूत में जड़ तक पैबस्त नहीं कर दिया .
इस आखिरी झटके का दर्द इतना ज्यादा था कि रोजी एक तेज तीखी चीख को दबा नहीं पायी और दर्द भरे आनंद के साथ झड़ गयी , लेकिन मैंने उसपे कोई ध्यान नहीं दिया; यह मेरी जीत का अंतिम नोट था, और केवल हमारे आनंद के स्वादिष्ट आकर्षण में जुड़ गया था क्योंकि मैंने अपने लंड को उसकी प्यार की म्यान के नरम, सुस्वाद परतों के भीतर में पूरा दफन कर सारा लावा वही उगल दिया था और हम एक दूसरे के साथ निकटतम संयोजन में थोड़े समय के लिए ऐसे लेटते हैं, जैसे हम दोनों परस्पर जुड़े हुए हो ।
उसके गले में अपनी बाजू डाल कर उसे अपने आलिंगन में लेकर उसके गुलाबी होठों और चेहरे, पर अगणित चुंबन किये वह मुझ से शर्माते हुए मेरे चुम्बनों का चुम्बनों से जवाब दे रही थी उसके गाल जो दर्द के आंसू जो उसकी सुंदर आँखों से निकले थे उनसे भीगे हुए थे . हालाँकि उसने सब दर्द जो मैंने उसे दिया था बहादुरी के साथ सहा था फिर भी वह उन आंसुओ को रोक नहीं पायी थी l.
कुछ देर बाद मेरी इच्छाओ ने फिर जोर मारा और मेरा लंड फिर कठोर हो गया था मैंने लंडमुंड को धीरे से बाहर निकाल दिया और धीरे-धीरे इसे फिर से उसकी चूत के छेद पर रख कर जोर से दबाया; असीम प्यार की एक मुस्कुराहट उसके प्यारे चेहरे पर आ गयी पिछले दर्द के सभी संकेत गायब हो गए, और मैं उसकी फूली हुई योनी की कोमल और रसदार सिलवटों को महसूस कर सकता था, जो मेरे कठोर लंड को जोर से जकड़ रही थी
मेरे झटको की गति एक पल में तेज हो गई, और ये सब इतना रोमांचक था- चूत के अंदर आगे और- पीछे जाते हुए घर्षण करते हुए लम्बा कठोर लंड , उसके पिछवाड़े से टकराते हुए मेरे लिंग द्वारा सहायता प्राप्त, शानदार अंडकोषों की खनखनाहट और फच फच के आवाज माहौल को मादक बना रही थी उसके सभी दर्द के बावजूद, रोजी ने परमानंद में मुझे अपने बाहो में जकड़ लिया था और कह रही थी और जोर से मेरे जानू और जोर से l
और मेरी पीठ को उसने अपने खूबसूरत लम्बी टांगो से कस लिया और मेरे नितम्बो को अपने पैरो से अपनी और दबा कर हमारे प्यार को अपनी पहली आहुति अर्पित की जिसे मेरी प्यार की छड़ी की हलचल से प्रेरणा मिली,थी . फिर मैंने उसके प्रेमरस में अपने रस की एक और धारा को बख्श दिया। उसका प्यार का फव्वारा, भी फूटा . हमारा एक साथ झड़ना उस आग को आंशिक रूप से ठंडा करने का एक प्रयास था जो हमारे भीतर भभक रही थीं। लेकिन हमारा उस आग को शांत करने का हर एक प्रयास उलटे आग में घी डालने का काम कर रहा था और हमारी कामाग्नि और भड़क रही थी I.
इतना नया, बेहद स्वादिष्ट, इतना अनोखा, स्वर्ग का अनुभव करवाने वाला , इसलिए स्वर्गीय संवेदनाएं थीं, वे खुशियाँ जो हम दोनों को महसूस हुईं इतनी परमानंद थीं कि हम एक दूसरे की बाहों में सांपों की तरह कराहते हुए लिपट गए ,
फिर रोजी बोली -
"हे भगवान! मैं मर जाऊं! ओह स्वर्ग! क्या आनंद, क्या आनंद। ओह! ओह! आह! आह! -अह!"
मजा आ गया सच में बहुत मजा आ रहा है
एक लंबी गहरी खींची हुई आह के साथ रोजी ने अपनी बात समाप्त की । हमारे आलिंगन और चुम्बन के कारण झटके मारते हुए उसका पूरा शरीर कांपने लगा और एक बार फिर वह झड़ गयी , उसने अपनी पकड़ के ढीला कर दिया, और एक कंपकंपी के साथ खुद को ढीला छोड़ दिया और बेहोश हो गयी और मैं, जो की बुरी तरह से हांफ रहा था उसके साथ चिपक कर उसकी बाहो में खो गया।
कुछ देर बाद जब हम नींद से जागे तो मैंने उठकर कुछ शराब गिलास में उंडेल कर रोजी को दे दिया, और एक भरपूर जाम अपने अंदर उड़ेल दिया , मैंने उसके योनी, जो मेरे वीर्य रोजी के प्रेमरस और योनि से निकले खून में भीगी हुई थी पर एक नरम चुम्बन, किया " और उसे लेकर टॉयलेट में गया और उसकी चूत और उसने मेरे लन्ड की धोया l और उसकी चूत पर क्रीम लगाई lउसके छूने से मेरा लंड फिर कठोर हो गया और रोजी ने भी मेरा लंड नहीं छोड़ा और लंड पकड़ कर ही मुझे कमरे में ले आयी और मुझे बिस्तर पर धक्का दे कर लिटा दिया
तो मैंने उसकी चूत को सहलाया और पुछा अब कैसी हो दर्द तो नहीं हो रहा तो वह बोली तुमने जो दर्द दिया है उसमे तुम्हारा प्यार छुपा हुआ है और उसे इस दर्द से प्यार हैl मैंने उसे प्यार से सहलाते हुए कहा मैं तुम्हे बहुत प्यार करता हूँ तुमने मुझे वह सुख दिया है जिससे मैं आज तक महरूम रहा हूँ तो वह भी बोली आप भी मेरे प्रियतम मुझे बहुत प्यारे हो l हालाँकि आपने मुझे बहुत बेदर्दी से चोदा पर उसमे भी आपका मेरे लिए प्यार ही छुपा था मैं अब बस सिर्फ आपकी ही बन कर रहना चाहती हूँ l क्या आप मुझे हमेशा ऐसे ही प्यार करेंगे . तो मैंने कहा रोजी . .
" तुम मेरे प्यार का सच्चा फव्वारा हो , तुम मेरी प्रिय, स्वादिष्ट कभी न ख़त्म होने वाले सुख और आनद की एकमात्र कुंजी हो इस क्षण से मेरा पूरा जीवन और आत्मा हमेशा आपके लिए समर्पित है।"
तो रोजी मुझ से लिपट गयी और मुझे मेरे सारे बदन पर बेतहाशा चूमने लगी और फिर उसके ओंठ मेरे ओंठो से जुड़ गए रोजी मेरे ऊपर आ गई थीं. मेरे खड़े लंड पर धीरे धीरे अपनी चूत दबाकर लंड को अन्दर घुसा रही थीं. मुझे उस समय मुझे बेहद मज़ा आ रहा था. वो मेरे लंड पर धीरे से उठतीं और फिर नीचे बैठ जातीं, जिसकी वजह से लंड अन्दर बाहर हो रहा था. वो खुद अपनी चुदाई मेरे लंड से कर रही थीं और बहुत मज़े कर रही थीं. सच कहो तो रोजी को मेरे लंड पर उछलते हुए मुझे बहुत सेक्सी लग रही थीं. . मैं अपने चूतड़ उठा कर उसका साथ दिया. जब मेरा लंड उसकी चूत के अन्दर पूरा समा जाता था, तो हम दोनों की आह निकल जाती थी. फिर मेरे हाथ उसके हिलते हुए मम्मों को मसलने लग गए
उसके बाद रोजी मेरे ऊपर झुक गयी और हम लिप किस करते हुए लय से चोदने में लग गए. मैं उसको चूमने लगा और चूमते चूमते हमारे मुँह खुले गए और मैं उसकी झीभ चूसने लग गया
फिर हम दोनों झड़ गए इसी तरह बार बार चोदते हुए "मैंने रोज़ी के साथ पूरी रात बिताई, अपने कुंवारेपन के आकर्षण का पूरा आनंद उठाते हुए हम दोनों ने अपने कुंवारेपन के भंग होने का जश्न पूरी रात एक साथ पूरे मजे लेते हुए बार बार लगातार हम चुदाई करते रहे कभी मैंने उसे चोदा कभी उसने मुझेअपनी और खींच कर अलग अलग आसान में चुदाई की और मानो अपनी कामाग्नि को शांत करना चाहते हो पर हर बार हमारी कोशिश नाकाम ही हुई और उसके बाद बहुत जल्द ही हम दोनों एक दुसरे को चूमते चाटते दुबारा शुरू हो जाते थे थोड़ा सा आराम करते , फिर से गले लगाते हुए, एक खुशी के समुद्र में तैरते हुए एक दुसरे में खोये रहे । पता ही नहीं चला इस तरह प्यार करते करते कब सुबह हो गयी
सुबह जब उजाला हुआ तो रोजी बिस्तर पर बैठी थी , लगातार बार बार चुदाई के कारण दोनों बुरी तरह से थक चुके थे पर शायद एक दुसरे के लिए आकर्षण और लगाव काम होने की जगह बढ़ गया था मुझे लग रहा था मैं रोजी के बिना अब नहीं रह पाऊँगा और चाहता था रोजी हमेशा मेरे पास रहे और मैं उसे जब चाहू प्यार कर सकू l रोजी की आँखों में भी मुझे वही प्यार नजर आया और मैंने रोजी को अपनी और खींचा तो वह मेरी बाहो में समा गयी और अपना चेहरा मेरी छाती में छिपा दिया।
उसने शुरू किया, "पिछली रात बहुत खास थी। मैंने कभी भी किसी से इतना जुड़ाव महसूस नहीं किया है, और अपनी पहली चढ़ाई की रात से ही किसी व्यक्ति के बारे में इतना मजबूत महसूस किया है। " मैंने कुछ कहना शुरू किया, लेकिन रोजी ने उसे रोकने के लिए अपना हाथ रखा।
"यह कल रात एकदम सही था, कम से कम मेरे लिए। आपने मुझसे ऐसा प्यार किया और मुझे लगा कि हम दो बदन एक जान हैं उसकी आँखों से अब आँसू बहने लगे थे, , कल रात, जब तुम मेरे पास आए, तो तुमने मेरे भीतर कुछ गहरा जागृत किया। मुझे ऐसा लगा कि मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं तो मैंने कहा मेरा भी यही हाल है l अब मैं भी तुमसे दूर नहीं रहना चाहता l और ये कहते हुए रोजी के ओंठो पर किश किया तो उसने भी वापिस किश किया l
उसके छूते ही लंड महाराज फिर जोश में आने लगे l उसे धीरे से उसे उठाते लिप किश करते हुए हुए, मैंने उउसके स्तनों को दबाना शुरू कर दिया, जबकि उसके हाथ का स्पर्श मुझमें नए सिरे से आग लगा रहा था फिर रोजी ने अपने हाथ में मेरा लिंग ले कर उसे सहलाया तो मेरी आह निकल गयी तो मैंने कहा अभी भी मैं और ये तुम्हे और प्यार करना चाहता है पर मैं बहुत थकान महसूस कर रहा हूँ l ,उसके छूने भर से मेरा लंड अपने विकराल आकार में आ गया
रोजी बोली अब मुझ में भी और चुदाई की हिम्मत तो नहीं है मैं भी बुरी तरह से थक चुकी हूँ और मेरी चूत भी एक दम से सूज गयी है और बहुत दुःख रही है पर मन अभी नहीं भरा है और ऐसा ही हाल मेरे लंड का था । लेकिन फिर भी मैं उसे एक बार और चोदना चाहता था और जब मैंने उसे अंतिम बार एक बार मुझे चोदने के लिए सहमत किया, मैंने सुझाव दिया कि हमें "अपने आप को एक संभोग के लिए सोचने की कोशिश करनी चाहिए," और बार बार लंड को चूत में अन्दर-बाहर करना, जैसे वो आम तौर पर संभोग के दौरान किया जाता है मुश्किल लग रहा था ।
तो मैंने कहा ऐसा करते हैं एक बार लंड अंदर घुसा लेने दो ये अब तुम्हारी चूत से दूर नहीं रहना चाहता हैं इसके बाद मैंने अपने कठोर हो चुके लिंग को उसकी चूत के छेद पर रखा और एक झटके पे पूरा का पूरा अंदर उतार कर योनि के अंदर गहराई से दफन कर दिया । और फिर, हम दोनों के शरीर एक दुसरे से लिपट गए और हमारी आँखें बंद थी , फिर मैंने रोजी से कहा जो हम दोनों ने कल रात किया उसे एक बार फिर सब मानसिक तौर पर महसूस करते हुए मन ही मन दोहराओ फिर मैंने अपने दिमाग (अपनी खुद की यौन कल्पनाओं) का उपयोग करते हुए सब ममानसिक तौर पर महसूस किया धीरे-धीरे मेरी मानसिक यौन उत्तेजना के उस बिंदु तक बढ़ गया जहां मैं संभोग का कारण बन गया मेरे मस्तिष्क की यही तरंगे रोजी ने भी महसूस करि और हम दोनों बिना अपने जननांग को धक्को द्वारा हिलाये सम्भोग करने लगे l
वास्तव में, जब रोजी मेरे साथ इस तरह से सम्भोग कर रही थी तो मैं रोजी के साथ अपनी पहली चुदाई के पूरे घटना क्रम को मानसिक तौर पर दोहरा रहा था और इससे अपनी मानसिक यौन उत्तेजना को इतने उच्च स्तर पर रखने में कामयाब रहा, रोजी से भी मैंने ऐसा ही करने को कहा कि रोजी को मैंने दो बार झड़ते हुए महसूस किया ।
हालाँकि मुझे शुरू में अपनी यौन उत्तेजना का निर्माण करने में थोड़ा समय लगा, लेकिन यह पता चला कि मैं वास्तव में "संभोग करने के लिए खुद को" सोच सकता था। और मैं ये सब कुछ देख सोच कर बहुत हैरान था
(अब हर चीज पर पीछे मुड़कर, मैं वास्तव में नहीं जानता कि मैं इस तथ्य से इतना हैरान क्यों था कि मेरे पास एक संभोग करने के लिए "खुद को सोचने" की क्षमता थी, क्योंकि मुझे पता था कि सेक्स शोधकर्ताओं ने हमेशा दावा किया था कि सेक्स वास्तव में 90% मानसिक और केवल 10% शारीरिक है।)
और आखिरकार उस दिन मैंने उस सुबह रोजी की चूत में अपना लावा जमा कर दिया, वो भी,एक बार भी, अपने लिंग को उसकी योनि में अंदर-बाहर किये बिना । अद्भुत यह मेरे और रोजी के सबसे लम्बे चलने वाले और कामुक यौन अनुभवों में से एक है।
वैसे, इस तरह से मानसिक सेक्स का मतलब का मतलब यह नहीं है पुरुष जानबूझकर योनि के अंदर घुसे हुए (गर्भाशय ग्रीवा के खिलाफ) अपने अन्यथा-स्थिर लिंग के सिर का विस्तार और अनुबंध नहीं कर सकता जो की आगे लगभग हर बार मानसिक सेक्स करते हुए मैंने रोजी के साथ अक्सर किया - इसी तरह रोजी भी मेरी हरकतों को महसूस करते हुए अक्सर मानसिक सेक्स के दौरान योनि के अंदर घुसे हुए कठोर लिंग को निचोड़ने और मालिश करने के लिए अपनी योनि में मांसपेशियों का उपयोग करती है यहां महत्वपूर्ण यही है की मानसिक सेक्स के दौरान हम जान बूझकर पैल्विक रॉकिंग या जननांग थ्रस्टिंग नहीं करते स्वाभिक तौर पर कुछ हो जाए तो उसे रोकते भी नहीं है ।
उसके बाद अपना लिंग रोजी की योनि के अंदर दाल कर ही हम दोनों गहरी नींद में खो गए उसके बाद हमारी नींद तभी खुली जब बॉब ने हमारे दरवाजे पर दस्तक दी तो हम मुश्किल से अपने आप को ठीक कर पाए। मैंने दरवाजे को तुरंत खोल दिया, और बॉब और रूबी अंदर आ गए। तो रूबी ने रोजी को बधाई दी और बॉब ने मुझे बधाई दी मैंने भी बॉब और रूबी का बहुक्रिया अदा किया के उनके कारण ही मुझे रोजी का साथ मिल पाया है और मैं प्रेम की दिव्य कला के रहस्यों को जान पाया था
फिर मैंने जब तक गाँव में रहे तब तक अपनी सारी रातें रोजी के साथ बिताईं, कभी-कभी उसके कमरे में में, फिर से मेरे अपने कमरे में कभी जब रात के इंतजार नहीं हो पाता था तो मैं उसे दिन में अपने कमरे में ले जाता, ये घर के किसी भी कोने में जहाँ हमे कोई नहीं देख रहा होता था और उसके साथ खूब आनंद लेता और रोजी भी हमेशा खुल कर मेरा साथ देती थी ।
एक दिन, जब रोजी मेरे साथ मेरे कमरे में, बिस्तर पर लेती हुई थी , उसके कपड़े ऊपर उठे हुए थे मेरा कठोर लंड उसकी चूत के अंदर बाहर हो रहा था अचानक रूबी ने कमरे में प्रवेश किया, क्योंकि मैंने जल्दबाजी में दरवाजा अंदर से बंद नहीं किया था
रूबी को मेरे खड़े लंड का एक अच्छा दृश्य मिला, और वह इसे देख रहा थी , जाहिर तौर पर मेरे लंड के इसके इतने बड़े होने पर आश्चर्यचकित थी लेकिन हम जिस हालात में थे उसे देख कर चुपचाप दरवाजा बंद कर चली गयी
आगे क्या हुआ ये कहानी जारी रहेगी
आपका दीपक
4 years ago